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सर्वकोश
मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 145 में से

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पृष्ठ 40

"हनुमत्प्रभुः"!
It must say "हनुमत्प्रभुः मे सक्थिनी अङ्कदेशं पातु"!
Yes! It is "हनुमत्प्रभुः मे सक्थिनी"!

Let's check line 23:
"तस्यैव चतुर्द्धा भजनमाह मध्यमिवित।" -> wait, is it "मध्यमिति ।"?
Look at the characters:
म (ma)
ध्य (dhya)
मि (mi)
ति (ti)
It's clearly "मध्यमिति ।"! (The dot inside is just text).

Let's check line 7:
"मानुषभावेऽपि ऐश्वरदिव्यायुधानां शाङ्गादीनां धारित्वादिव्यायुध आयुध-"
Wait, is it "शार्ङ्गादीनां"?
Look above the 'शा': there is a repha 'र्'!
Yes, there is a distinct curved hook above शा: "शार्ङ्गादीनां"!
And after 'धारित्वा': is it 'द्दिव्यायुध' or 'दिव्यायुध'?
It looks like "धारित्वाद्दिव्यायुध" or "धारित्वादिव्यायुध"?
There is a single 'द' with 'ि': "धारित्वादिव्यायुध".

Let's check line 8:
"निधानस्थानभूतो स्कन्धौ मे पातु ९। तथा भुजबलेनैव भग्नेशकार्मु