मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary
नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना ११
का पद्यानुवाद और रामायण मसीही आदि प्राप्त हैं। इसी प्रकार द्रविड़
भाषाओं में, तमिल में तमिल-रामायण, तेलुगु में द्विपद रामायण आदि,
मलयालम में रामचरितम् आदि तथा कन्नड़ में तोर वे रामायण आदि
विद्यमान हैं। आदिवासी भाषा-भाषियों की कथाओं में भी रामकथा
अनेक रूपों में प्राप्त होती है। इस प्रकार रामकथा सम्पूर्ण भारत तथा
इसके निकटवर्ती देशों की संस्कृति तथा साहित्य में पूर्णतया व्याप्त है
और इसी से इसकी व्यापकता तथा महानता के सम्बन्ध में अनुमान
लगाया जा सकता है।
भारत के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक जीवन पर मर्यादा-
पुरुषोत्तम के रूप में राम का अमिट प्रभाव विद्यमान है। हिन्दू-परिवारों
में अतीत से ही अनेक माङ्गलिक अवसरों पर रामचरित से सम्बन्धित
गीत गाये जाते हैं और अन्तिम शरीर-यात्रा भी राम के नामोच्चारण
की ध्वनि के साथ ही पूर्ण होती है। भारत में विद्यमान मन्दिरों के
ऊपर यदि विचार किया जाय तो हम यही पाते हैं कि इस पवित्र देश
के कोने-कोने में राम के मन्दिर हैं तथा यहाँ के असंख्य लोग प्रतिदिन
रामकथा के प्रतिनिधि-भूत ग्रन्थ रामायण का पाठ करते हैं एवं राम
के जीवन से सम्बन्धित अयोध्या, चित्रकूट, पञ्चवटी तथा रामेश्वर
आदि तीर्थों की यात्रा करके अपने को कृतकृत्य मानते हैं। मात्र
हिन्दुओं के ही नहीं अपितु थाईलैण्ड एवं कम्बोडिया तथा हिन्देशिया
आदि सुदूर देशों के व्यक्तियों तथा स्थानों के नाम भी रामकथा से
सम्बन्धित हैं। भगवान् के नामों में भारत में सर्वप्रसिद्ध नाम 'राम' ही
है और यह नाम भारतीय जीवन में रम-सा गया है तथा उससे इसका
एकाकार पूर्णरूपेण स्थापित है। ऐसी स्थिति में तो रामकथा की
ऐतिहासिकता पर किसी प्रकार का प्रश्न उठाने का अवकाश ही नहीं
रह जाता।
फिर भी आधुनिक युग में इस सन्दर्भ में प्रश्न उठाये गये हैं और
पाश्चात्त्य विद्वानों ने अन्य ऐतिहासिक मुद्दों की भाँति इन प्रश्नों का
समाधान भी अपने-अपने अनुसार कर डाला है, यद्यपि सत्य अतीत के
गर्भ में अन्तर्हित है। इस परिप्रेक्ष्य में सर्वप्रथम वैदिक वाङ्मय तथा
रामकथा में क्या कोई सम्बन्ध है, इस प्रश्न को लिया गया है।
रामकथा के अनेक पात्रों आदि के नाम हमें वैदिक साहित्य में