मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary
नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा
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से उनमें विद्यमान आदर्श गुण हमारे हृदय-पटल पर अङ्कित हो जाते
हैं तथा जनकनन्दिनी सीता का नाम आते ही हमारे समक्ष असाधारण
पातिव्रत्य की एक अप्रतिम प्रतिमा प्रस्तुत हो जाती है और हम
परमानन्द की अवस्था का अनुभव करने लगते हैं। पूरा भारत देश
रामकथा से इतना ओतप्रोत है कि राम तथा सीता हमें अतीत युग के
प्राणिमात्र नहीं लगते, प्रत्युत ऐसा भासित होता है कि वर्तमान में भी
उनका अपूर्व व्यक्तित्व हमारे नेत्रों के समक्ष उपस्थित है, जिसे आदर्श
मानते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। रामकथा के प्रतिनिधिभूत ग्रन्थ
वाल्मीकि-रामायण की सर्वाङ्गीणता की ओर सङ्केत करके कवीन्द्र
रवीन्द्रनाथ ने इस कथा के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए ही यह
कहा था कि इसकी प्रधान विशेषता यही है कि इसमें गृहस्थ जीवन-
चर्या का वर्णन विस्तृत रूप से प्राप्त होता है। पिता-पुत्र, भाई-भाई,
पति-पत्नी आदि में जो धर्म तथा समाज के सूत्र एवं प्रेम तथा भक्ति से
युक्त सम्बन्धादि हैं, उनको उजागर करते हुए 'रामायण' ने इतना
महान बना दिया है कि वह सहज-रूप में महाकाव्य के उपयुक्त हो
गया है। हिमालय सदृश उच्च और व्यापक आदर्शों तथा सागर सदृश
गम्भीर विचारों का एक साथ किसी एक ग्रन्थ में समावेश हो पाया है
तो वह 'रामायण' ही है। अपने इन्हीं मौलिक वैशिष्ट्यों के कारण देश
तथा काल की सीमाओं को छोड़कर 'रामायण' आज विश्व साहित्य की
महान् कृति है एवं महामुनि वाल्मीकि विश्वकवि के रूप में सर्वत्र पूजित
हो रहे हैं।
इन्हीं उदात्त गुणों के कारण रामकथा ने केवल भारत में ही नहीं,
अपितु इसके निकटवर्ती देशों की संस्कृति तथा साहित्य में महत्त्वपूर्ण
स्थान प्राप्त किया है और तिब्बत, खोतन, हिन्दोनेशिया, हिन्द-चीन,
थाईलैण्ड एवं बर्मा आदि देशों तक कालान्तर में इसका अनेक रूपों में
प्रचार-प्रसार हुआ है। आधुनिक भारतीय भाषाओं में यह सर्वत्र व्याप्त
है। आर्य भाषाओं के साहित्य में सिहली रामकथा, काश्मीरी रामायण,
असमिया में माधव-कन्दली-रामायण आदि, बंगला में कृत्तिवास-
रामायण आदि, हिन्दी में श्री रामचरितमानसादि, मराठी में भावार्थ-
रामायणादि, गुजराती में रामलीला ना पदो आदि, उर्दू में रामायण
खुश्तर और रामायण मंजूम आदि एवं फारसी में वाल्मीकि रामायण