मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)
Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary
नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रस्तावना
राम-कथा ने भारतीय समाज को चिर अतीत से ही अनुप्राणित
किया है। इसकी महिमा वर्णनातीत है। सम्प्रति दूरदर्शन पर रामकथा
प्रदर्शित हो रही है और इसके प्रदर्शन के समय नगरों की सड़कें तथा
गलियाँ वीरान हो जाती हैं, क्योंकि सम्पूर्ण भारतीय समाज दत्तचित्त
से उसे देखने में संलग्न रहता है। इतना ही नहीं, इस कार्य को वह
पूर्ण आदरभाव, भक्ति और निष्ठापूर्वक सम्पन्न करता है। असंख्य नर-
नारी इसे देखने में स्नान करके उपवास रखते हुए ही प्रवृत्त होते हैं।
यह स्थिति आधुनिक युग की है, जिसे सनातन परम्परा में 'कलिकाल'
की संज्ञा प्रदान की गयी है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है
कि इसके पूर्व इस कथा के प्रति भारतीय जन-मानस की कितनी
आदरयुक्त निष्ठा रही होगी। रामकथा आदिमहाकाव्य, परवर्ती कतिपय
महाकाव्यों एवं अनेक काव्यों का प्रेरणा-स्रोत तो है ही, साथ ही यह
भारतीय परिवार को धर्म-पथ में नियोजित करनेवाली, आचार तथा
विचार की स्थापिका एवं संस्कार-सम्बन्धों की आदर्श-स्वरूपा है और
इस पवित्र देश की चिरन्तन भक्ति, ज्ञान एवं मैत्री भावनाओं का प्रति-
निधित्व सर्वाङ्गीण-रूप में करती है। इस कथा में जो आदर्श चित्रित
हुए हैं, वे मात्र भारतवर्ष के लिये ही मान्य अथवा आदरणीय नहीं हैं,
अपितु वे जगत् के मानव-मात्र के समक्ष उच्च नैतिक स्तर तथा
सामाजिक उदात्त भावना को प्रस्तुत करते हुए उसकी प्रतिष्ठा करते
हैं। यह कथा जीवन के स्थायी मूल्य-युक्त तत्त्वों, तथ्यों तथा सिद्धान्तों
पर आधारित है। इसमें अतीत, वर्तमान तथा अनागत की समस्त
पीढ़ियों को समीचीन रूप से राह दिखाने की क्षमता विद्यमान है, अतः
यह उदात्तता, अर्थ एवं काम की धर्मानुकूलता, विपत्ति-काल में विपत्ति-
ग्रसित व्यक्ति को संरक्षण प्रदानत्त्व, प्रताड़ित मानव की रक्षणीयता
तथा शरणागत को शरण देने आदि महनीय गुणों से संवलित है और
इस प्रकार यह विश्व के शाश्वत मूल्यों से युक्त है।
रामकथा के सर्वोज्ज्वल चरित्र श्रीराम का नाम-श्रवण करने मात्र