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सर्वकोश
मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 145 में से

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पृष्ठ 132

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९६ मन्त्ररामायण
मनु और सूर्य जिस वंश के प्रवर्तक हैं, उस वंश में जन्म लेने वाला
मैं ही मनु और सूर्य हूं, जिस अवतार के लिए दशरथ ने ऋषि को दान
से सन्तुष्ट किया, वह दीर्घदर्शी कार्यज्ञ ऋषि मैं हूं, मैं ही आर्जुनेय को
आयुष्य प्रदान करने वाला हूं । भृगु ने जो 'तुम्हारी पत्नी का हरण
अन्य कोई करेगा' शाप दिया था वह भी मैं ही हूं । मेरे शत्रुओं की
वृद्धि का कारण जो शुक्र है वह भी मैं हूं इसीलिए उपासक को सभी में
राम का दर्शन करना चाहिए ।
एवं राममुपासीनो रामतादात्म्याभिमानात्सार्वत्म्यं प्राप्तो वामदेवापरनामा
रुद्रो रामविशेषणैरात्मानं स्तौत्याह बृहदारण्यकश्रुतिः, तद्धैतत्पश्यन्नृषिर्वाम-
देवः प्रतिपेदे--अहं मनुरभवं सूर्यश्चेतीति । यस्मिन्वंशेऽहमुत्पन्नस्तत्प्रवर्तकौ
मनुसूर्याविहमेवाभवम्, यच्चमदवतारनिमित्तं दशरथेन तोषितः क