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सर्वकोश
मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

मन्त्र रामायण (नीलकण्ठ चतुर्धर - पं. रामकुमार राय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Mantra Ramayana of Nilakantha with Hindi Commentary

नीलकण्ठ चतुर्धर (टीकाकार: पं. रामकुमार राय) द्वारा

DevanagariHindipublished145 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 145 में से

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पृष्ठ 131

(saḥ) ।
शि (shi) व (va) मि (mi) त्य (tya)
र्ध (rdha) / र्थ (rtha)?
मा (mā) त्रा (trā)
[space/break]
नि (ni) / वि (vi)
न्द् (nd)
ता (tā) / दा (dā) / ना (nā)
व (va)
श्य (shya) / च्य (cya)
प (pa) रि (ri) शि (shi) ष्ट (ṣṭa)
इ (i) ति (ti)
Let's look at the characters:
Is that: "निन्दतावश्य"?
Wait, look at the fourth character from 'नि':
It is 'व'.
The fifth is 'श्य'.
Is the third 'ता'?
Wait, could it be "निन्द्यतावश्य"?
Wait, why would anything be "निन्द्यतावश्य परिशिष्ट इति"?
Wait! Look at the preceding sentence:
"प्रपञ्चोपशममिति षण्णामुपाधीनां अद्वैतमिति सर्वेषां निरासः ।"
All the previous words in Mandukya 7 are negations (निरास):

  • "न प्रज्ञानघनम्" इति विशेषविज्ञानहीनस्य प्राज्ञीयस्य [निरासः]
  • "अदृष्टम्" इति ... सौप्तस्योपाधेः [निरासः]