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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 682, कुल 856 में से

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पृष्ठ 682

188 MĀNASĀRA
26. (1) I. भागमे, J. भागिकै। (2) J. द्विशालिकम् for विशालकम्।
28. I. नाडी for नासि suggested by the other Mss.
29. I. सार्धं for चार्ध suggested by the other Mss.
30. I. नाडी for नासि, suggested by the other Mss. B. नाश विनाशे तु
चतुस्रं च विभासिते।
31. Between the lines 31 and 32, I. repeats the lines 17—19 except
the last pāda of 19 which runs as follows: कन्यसादि त्रियं त्रियम्।
32. B. स्थितस्यादुपमालांतं।
34. J. फलिका, B द्वयंशंतत् पलकांतकं।
35. I. सान्तरं, the other Mss. चान्तर।
36. (1) B. नासिकासने। (2) J. फिंबरी।
37. B. नासिकातत् for the first expression.
38. (1) B. नूतादि for भूतादि। (2) B. J. यत्र for चित्र।
39. B. omits this line.
40. (1) J. ग्रथाङ्गं, B. ग्रथा(ग्रा)स्वां, I. याश्चाङ्गं।
(2) B. पुष्टिदामैं।
41. (1) B. J. लभते for लम्बने।
(2) B. करादितत्समंकृत्वा लभते भद्रसंयुक्तं।
42. (1) B. वलकी for पालिके। (2) B. श्रेणी। (3) I. प्रोक्त for वृत्त।
43. (1) J. युक्ता। (2) I. J. यज्ञे for यज्ञ।
45. B. रादि विनिर्गमम्, J. वर्गकम्, I. वन्दिकम् for the last expression.
46. (1) J. तंह्वा। (2) B. क्रिया for श्रिया।
47. (1) I. पूर्णाङ्गं for कुर्याल्छु। (2) I. नास्य for नासि suggested by refer-
ences and the other Mss. J. नाडी।
49. B. एकांश कण्ठेकूटं स्यात् सपादांशमदिष्ट(धिष्ठा)नां।
50. I. चाश्विन्यादि, J. न्यांशे, B. चाशिन्यांशं गलोदकं।
51. B. सखोदयं for the last expression.
53. B. पूर्वदेवंतु।
54. I. हर्म्य तु for हर्म्यस्य।
55. B. मध्य for मध्ये।
56. B. दंडं वा for दण्डेन।
57. (1) I. शाखा, the other Mss. शाला। (2) B. हारकवंचरं।