मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
पृष्ठ 611, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ेंCRITICAL NOTES : CHAPTER X 67
75. A. F. समुदं तदिवं, B. समुदं तुदसं ।
77. (1) A. F. प्रदेशे तु for प्रतितटे । (2) B. दोषकै, A. F. द्रोणैयुक्तं इचैव
for the second pāda.
79. I. J. दुर्लंभ for क्षुल्लक, suggested by A. B. F. and seems more
suited to the sense.
80. A. F. नास्यात् त्राश्रयांद, B. नरस्यादावाश्रयाडु for नास्वादमग्रहार in
I. J. ; the emendation within brackets is suggested by B. A. F.
81. J. I. वर्धकं वप्रमोरितम् for the second pāda ; the emendation
is suggested by B. and supported by the contents (see line 41 above).
82. A. F. कोष्टकम् for कोलक ।
83. (1) I. वद्योन्यांत्य for वर्णांन्तर । (2) B. युक्तं तु स्ववृतम् for जनैर्वृतम् ।
84. A. F. नियतं, I. निर्गमं (which is apparently a copyist's mistake,
see line 42), for निगमं ।
85. A. F. त्ल, B. भूषा for तोर ।
86. (1) B. मंढप for मन्दिर । (2) I. J. स्कन्धावार समन्वितम् for स्कन्धावार-
मुदाहृतम्, suggested by line 42 above.
87. A. F. गृहं तस्यादिकोदिकः, B. गृहतश्चरिररितः ।
88. I. हित्य प्रं, B. भृत्यार्थ for हित्यर्थे ।
89. (1) A. B. F. सताशति for सर्वाननि । (2) A. F. दुर्गादि, B. दुर्गोत्ति
for दुर्गाणि ।
90. A. B. F. रख for वन ।
92. (1) I. मृत for वृत, suggested by J. and the other Mss. (2) B.
सर्व for second पर्व । (3) A. B. F. समीपणे for समीषके ।
94. I. न for तल, suggested by J. and the other Mss. The वनदुग
is defined as खजनोदकं स्तम्बगहनं वनदुर्गं in the Artha-śāstra (see the writer's
Dictionary, page 259). In this line पर्जन्य may mean उदक, प्रन्तर
may stand for गहन and गगन for ख ।
97. B. दुर्गमैः for कन्दरैः ।
98. I. नृपतिः सर्वैत for नृपतिस्तिष्ठेत, suggested by J. and the other
Mss.
99. (1) A. F. पाना for वना, and दृरकम् for दृषकम् । (2) B. नवमेक-
जलाभासात् पमान्य बिट्टुरकम् ।