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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 588, कुल 856 में से

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पृष्ठ 588

44 MĀNASĀRA
93. (1) J. तृतीयाण्ड । (2) A. B. नन्दार्कं ।
(3) A. F. सप्रयेत् for षट्क्रमात् । (4) I. J. .....धिः for सुधीः, suggest-
ed by the other Mss.
94. I. वख्यायि for विन्यास ।
95. (1) J. समा for सम । (2) A. F. तालं for तारे ।
96. (1) I. वप्रं for वक्त्रं in both the places.
(2) J. वर्मायतं, B. वदा for वक्रायतम् । A. F. omit this line. Compare
the line 108 below.
97. (1) A. F. पतद्वयं त्रयं, J. पतद्वित्रितयं, B. वितस्तिद्वित्रयं ।
(2) त्रितय for त्रि or त्रय seems a peculiar expression in the text.
(3) B. रत्न for रथ्याम् ।
98. A. F. नीथो, B. विधिना ।
99. B. कपोतस्य for वीथीं कृत्वा ।
101. (1) I. विधा for वृता suggested by J. (2) A. F. विधि समवेता for
the second pāda.
(3) B. मध्यान्धावुपानद्यास्यामदेव विधीयते ।
102. (1) J. तत्स्थाठि, B. तत् शांति, A. ध्याहिनवान्त for तत्समं तुवा ।
103. I. प्रस्या for रथ्या, suggested by J. and the other Mss.
104. (1) A. F. मूच्छा, B. मुख्य । (2) I. विधि for वीथी ।
105. I. J. त्रिश्चतुः for तच्चतुः, suggested by A. B. F.
106. I. J. तथायत for तदायंतम्, suggested by A. F.
B. omits the second pāda.
107. (1) D. I. परिघा ।
(2) A. F. परि for परिखा ।
108. A. B. F. चतुर्दशी ।
109. (1) I. .....न्तु for विष्णुश्चिष्यन्तु, suggested by J. and the other Mss.
(2) I. पक्ष्म for पश्चिम ।
110. I. वरुणेक्ष, B. वरुणीच, A. F. वारुणेव, the emendation is
suggested by J.
111. (1) J. वातु, A. F. वापि, B. पीठं for चापि । (2) I. मूर्ती ।
(3) I. B. यथेष्टकः, A. F. स्तथाष्टकं ।
113. I. J. हर्म्यका, B. हर्म्यके, the emendation follows A. F.