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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 447, कुल 856 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 447

->श्री(स्त्री)हीनमर्थनाशनम् ।`

क्षुद्रगर्भग्हमधिक्यं हीनं चेद् ग्रामनाशनम् ॥ १८ ॥
Wait, look at क्षुद्रगर्भग्हमधिक्यं:
Wait! Is it क्षुद्रगर्भग्हमधिक्यं or क्षुद्रगर्भग्रहमधिक्यं or क्षुद्रगर्भगेहमधिक्यं?
Look at the characters:
क्षु द्र ग र्भ गृ ह?
Wait, under ग: is it ्द or ्र or ृ?
Look closely at क्षुद्रगर्भ...:
क्षु - kṣu
द्र - dra
ग - ga
र्भ - rbha
Then: गृ? It has a vertical stem and a hook? No, it looks like ग with ृ?
Wait, no, look at the letter: गृ or ग्र or गे?
Wait, the top has no e-matra.
It's ग with something below: wait, no, it is गृ or ग्र?
Wait, look at ह after it: ह.
So it is गृहमधिक्यं?
Wait! Look at ग: