मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)
Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya
मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा
DevanagariHindipublished856 पृष्ठ
पृष्ठ 212, कुल 856 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 212
? Yes, (र्धं)! And before the parenthesis: द्वयमप्युर्ध्वorद्वयमप्युच्च? It is द्वयमप्युच्च(र्धं)orद्वयमप्युर्ध्व(धं)? Wait, प्युthenच्च? Yes, च्चwith parenthesis(र्धं)`.
Let's check line 10:
द्विभागं चोर्ध्वपादं चैकांशं चोपरि मञ्चं स्यात् ।
Line 11:
तत्समं वेदिकोत्सेधं ग्रीवतुङ्गं कलांशकं स्यात् ॥ १६ ॥ 32
Line 12:
वेदांशं शिखरोत्तुङ्गं शेषांशं शिखरो(खो)दयं कथितम् ।
Line 13:
ऊर्ध्वं चोर्ध्वतले सर्वे कर्णहर्म्यादिमण्डितम् ॥ १७ ॥
Line 14:
एकभाग(गं) द्विभागं वा चान्तश्चावृतालिन्दकम् ।
Line 15:
अधिष्ठानोपपीठे वा महावेद्यादिमेव वा ॥ १८ ॥ 36
Line 16:
ऊर्ध्वं चोर्ध्वतले कुर्यात्सर्वालङ्कारसंयुतम् ।
Line 17:
`नानालङ्