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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 856 में से

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पृष्ठ 197

/कर्य. Letter 3: हLetter 4:म्या(no repha). So it is printed as:कर्यहम्यादिभूषितम्`!

Line 21:
तदेव(वं) हर्म्यमूले तु पूर्ववत्परिकल्पयेत् ।
Notice तदेव(वं) - original तदेव, corrected to (वं).

Line 22:
तच्चतुर्द्वारसंयुक्तं चांशेन भद्रसंयुक्तम् ॥ २२ ॥

Line 23:
एवमीश्वरकान्तं स्यादधिष्ठानादि(नं) क्रमान्नयेत् ।

Line 24:
तुङ्गे पञ्चदशांशं स्याद्व्यंशक(कं) मसूरकम् ॥ २३ ॥

Line 25:
पादतुङ्गं षडंशं स्यात्प्रस्तरोच्चं गुणांशकम् ।

Line 26:
तत्समं चोर्ध्वमञ्चं स्यात्तदूर्ध्वं पञ्चरांशकम् ॥ २४ ॥
Wait, "पञ्चरांशकम्" or "पञ्जरांशकम्"?
Look at the dot/letter: प, ञ्ज or ञ्च with रा?
It is पञ्चरांशकम् (with ञ्च) or पञ्जरांशकम्? It looks like `पञ्ज