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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 185, कुल 856 में से

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पृष्ठ 185

१५० मानधारे [ध्यायः
तदेवाकारमायामं तत्तन्नाम्ना प्रकीर्तितम् ॥ ९६ ॥
एवं प्रोक्तं हर्म्यके मध्यभद्रं 192
शालाकोष्ठं दिग्विदिक कूटयुक्त(कम्) ।
द्वारा श्रान्ता नासिका पञ्जराढ्यं
कुर्यात्सर्वं वेदिकाभद्रयुक्तम् ॥ ९७ ॥
हर्म्यतारसमं चतुरंशकं तन्त्रिपादमर्धमथापि वा 196
कुड्यतारसमादि यथाक्रमम् ।
कन्यसं त्रिविधं मुखमण्डपम्
तन्मुखमण्डप(पं) मुख्यविमाने ॥ ९८ ॥
मध्यविमानस(स्य) मण्डपपार्श्वे 200
अन्तरं दण्डमथ द्वयदण्डम् ।
हर्म्यवशादुपवेशनयुक्तम्
यत्तत्क्षुद्रविमाने तन्मुखे मण्डपं स्यात् ॥ ९९ ॥
तद्द्वयोर्मध्यदेशे चैकाध(ध्य)र्ध हस्तविस्तारम् । 204
अथवा त्रिपाद