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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 856 में से

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पृष्ठ 163

३२८ मानमारे [अध्यायः
कुर्यात्तु शिल्पिविद्भिः क्षुद्रपञ्चतले न्यसेत् ।
पङ्क्त्येकपङ्क्ति(द्व्यै)र्कांशः(श)द्वा(त्रयो)दशांशे विशालके ॥ १३ ॥
एतत्तु मध्यमं पञ्चतलं हर्म्यं (ए)व कारयेत् ।
ईशाद्वादशकैकार्कं मनुभागं तथैव च ॥ १४ ॥ 28
एतद्भागविशाले तु श्रेष्ठं पञ्चतलं भवेत् ।
अर्कसैकार्कभागं तु मनुपञ्चा(ष्वा)दशांशकम् ॥ १५ ॥
एतद्वै पूषके कुर्यात्क्षुद्रषट्तलहर्म्यकम् ।
सैकार्कांशं मुनिं चांशं तिथिशोडशभागिकम् ॥ १६ ॥ 32
षट्तलं मध्यमं प्रोक्तं कुर्याद्धर्म्यविशालके ।
त्रिचतुः(तुष्प)ञ्चषट्सैकाधिकं दशभागिकम् ॥ १७ ॥
श्रेष्ठं षट्तलमित्युक्तं यथा कुर्याद्विचक्षणः ।
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