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सर्वकोश
मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

मानसार शिल्पशास्त्र (प्रसन्ना कुमार आचार्य - प्राचीन भारतीय स्थापत्य, नगर-नियोजन व मूर्ति-शिल्प महाकोश)

Manasara on Architecture and Sculpture by P.K. Acharya

मानसार ऋषि (अनुवादक: डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished856 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 856 में से

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पृष्ठ 131

or(ले प). It is printed: पादमूले(ले प)कदण्डेन`!

  • L23: तद्विस्तारं द्विदण्डेन कुम्भतुङ्गं द्विदण्डकम् ॥ ३७ ॥

  • L24: तद्विस्तारं त्रिदण्डं स्यात्तदर्धं वास्य तुङ्गकम् ।

  • L25: तत्पादस्याग्रके कुर्यान्नासिकापञ्जरान्वितम् ॥ ३८ ॥
    Right margin: 76

  • L26: शक्तिध्वजै(जमे)कदण्डं स्यान्नासितुङ्गं द्विदण्डकम् ।
    Wait, शक्तिध्वजै(जमे)कदण्डं - let's check spacing:
    शक्तिध्वजै(जमे) कदण्डं or शक्तिध्वजै(जमे)कदण्डं?
    There is a tiny space: शक्तिध्वजै(जमे) कदण्डं or शक्तिध्वजै(जमे)कदण्डं. Let's look closely at (जमे):
    शक्तिध्वजै(जमे)कदण्डं - wait, the editor emended जै to जमे: शक्तिध्वजमेकदण्डं!
    Yes! शक्तिध्वजै -> (जमे) replaces जै! So `शक्तिध्वजमे