मलूकदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - ज्ञानपरोछी, साखी एवं अमर पद संग्रह)
Malukdas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त मलूकदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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जीवन-चरित्र
पास का स्थान और भोजन को आपके भोग के दाल चावल के पछोरन किनका का
रोट और तरकारी के छीलन की भाजी मिले जगन्नाथजी ने स्वीकार करके आज्ञा दी
कि हमारे भोग से बढ़कर संवाद तुम्हारे भोग में होगा । जगन्नाथजी के पनाले के पास
मलूकदासजी का स्थान अब तक मौजूद है और उनके नाम का रोट अब तक जारी है,
जो जात्रियों को जगन्नाथजी के भोग के साथ प्रसाद में मिलता है ।
बाबा मलूकदासजी के पंथ की मुख्य गद्दियाँ मौज़ा कड़ा ज़िला प्रयाग, जैपुर,
इस्फ़हाबाद, गुजरात, मुलतान, पटना ( बिहार ), सीताकोयल ( दक्खिन ), कलापुर,
नैपाल और काबुल में हैं । उनके रचे हुए ग्रन्थ भी कितने ही हैं जिनमें मुख्य रत्नखान
और ज्ञानबोध समझे जाते हैं परन्तु वह ऐसे हिन्दी अक्षर में हैं जिन्हें उनके कुनबेवाले
आप नहीं पढ़ सकते और न उनके पढ़ने का जतन करते छपवाने की बात तो दूर है ।
यह थोड़े से चुने हुए शब्द और साखियाँ जो छापी जाती हैं हम को कृपा पूर्बक
बाबाजी के परम भक्त लाला रामचरनदासजी मेहरोत्रे खत्री कड़ा वाले ( बाबू
शिव प्रसादजी अकौन्टेन्ट इलाहाबाद बैंक के पिता ) ने बाबाजी के असल दस्तखती
पुस्तक से नक़ल करा दी हैं जिसके लिये हम उनको अनेक धन्यवाद देते हैं ।
संत चरण-धूर,
एडिटर, संतबानी पुस्तक-माला ।