महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)
Mahanirvana Tantra with Hindi Translation
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें७४ | हिन्दी महा-निर्वाण तन्त्र
अर्थात् यह सुन्दर मेखला मेरे लिए कल्याणकारिणी हो।
तब मौन होकर बालक गुरु के सामने खड़ा हो (१६४)। अब गुरु निम्न मन्त्र को पढ़कर बालक को
कृष्णाजिन से युक्त यज्ञोपवीत और वेणु या खदिर या पलाश या क्षीर-वृक्ष की लकड़ी से बना दण्ड प्रदान करे-
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, बृहस्पतिर्यत् सहजं पुरस्तात् ।
आयुष्यमग्र्यं प्रति-मुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः ॥
अर्थात् यह यज्ञोपवीत परम पवित्र है, जो पूर्व काल में वृहस्पति का स्वाभाविक था। आयुष्यकर, श्रेष्ठ,
शुभ्र इस यज्ञोपवीत को तुम धारण करो। तुम्हारे बल ओर तेज की वृद्धि हो (१६५-१६६)।
इसके बाद दण्ड और उपवीत-धारी बालक को गुरु 'ह्रीं आपोहिष्ठा ह्रीं' मन्त्र का तीन बार उच्चारण
कर कुश-जल द्वारा अभिषिक्त कर जल से बालक की अञ्जलि को पूर्ण करें (१६७)। फिर ब्रह्मचारी उसी
जलाञ्जलि से सूर्य के लिए अर्घ्य प्रदान करे। तब गुरु 'तच्चक्षुर्देव-हितं' मन्त्र का पाठ करते हुए शिष्य को सूर्य
का दर्शन कराये (१६८)।
सूर्य का दर्शन कर चुकने पर बालक से गुरु कहे-
मम व्रते मनो धेहि, मम चित्तं ददामि ते । जुषष्वैक-मना वत्स ! मम वाचोऽस्तु ते शिवम् ।
अर्थात् तुम मेरे व्रत में मन लगाओ। मैं तुम्हें अपना चित्त देता हूँ। हे पुत्र ! तुम एक-मन होकर मेरे व्रत
का आचरण करो। मेरी वाणी से तुम्हारा कल्याण हो (१६६)।
इस मन्त्र को पढ़कर गुरु बालक के हृदय को छूकर उससे पूछे-
‘किं नामासि ?'
अर्थात् तुम्हारा नाम क्या है ?
उत्तर में शिष्य कहे-
‘अमुक-शर्माऽहं भवन्तमभिवादये ।'
अर्थात् मैं अमुक शर्मा आपको प्रणाम करता हूँ (२००)।
हे पार्वति ! तब गुरु यह पूछे-
‘कस्य त्वं ब्रह्मचारी ?’
अर्थात् तुम किसके ब्रह्मचारो हो ?
शिष्य सावधान होकर उत्तर दे-
‘भवतो ब्रह्मचार्यहम् ।'
अर्थात् मैं आपका ब्रह्मचारी हूँ (२०१)।
इस पर सद्गुरु कहें-
‘इन्द्रस्य ब्रह्मचारी त्वमाचार्यस्ते हुताशनः ।'
अर्थात् तुम इन्द्र के ब्रह्मचारी हो, तुम्हारे आचार्य हुताशन हैं।
ऐसा कहकर सद्गुरु निम्न मन्त्र पढ़कर शिष्य को देवताओं के निकट समर्पित करे-
त्वां प्रजापतये वत्स ! सवित्रे वरुणाय च, पृथिव्यै विश्व-देवेभ्यः सर्व-देवेभ्य एव च ।
समर्पयामि ते सर्वे रक्षन्तु त्वां निरन्तरम् ।