माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 274, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें(२५६) माधवनिदान ।
कच्छुकुष्ठ वही पामा मोटे फोडोंकरके तथा तीव्रदाहयुक्त होय और हाथोंमें हो,
उसको कच्छु कहते हैं । उग्रा यह चूतडमें होती है ॥
विस्फोटकुष्ठके लक्षण ।
स्फोटाः श्यावारुणाभासा विस्फोटाः स्युस्तनुत्वचः ।
विस्फोटिक फोडे काले व लाल रंगके होयँ और जिनकी त्वचा पतली होय
उसको विस्फोट कहते हैं ॥
शतारुकुष्ठके लक्षण ।
रक्तं श्यावं सदाहार्ति शतारु स्याद्बहुव्रणम् ॥ २३ ॥
शतारु लाल, होय, श्याम होय, जलन होय, शूल होय तथा जिनमें अनेक फोडे
होयँ उसको शतारुकुष्ठ कहते हैं ॥
विचर्चिकाके लक्षण ।
सकण्डूः पिडिका श्यावा बहुस्रावा विचर्चिका ।
विचर्चिका खुजलीयुक्त, काले रंगकी जो फुन्सी (माताके समान) होय तथा
उसमेंसे स्राव बहुत होय, उसको विचर्चिका कहते हैं। चर्मकुष्ठसे लेकर विचर्चिका-
कुष्ठ पर्यंत १२ कुष्ठ होते हैं और पीछे क्षुद्र कुष्ठ ११ कहैं हैं, ऐसी कोई शंका करे
उसके निमित्त कहते हैं । विचर्चिका पैरोंमें होकर फूटकर अर्थात् विपादिका होय हैं
ऐसे कहनेसे संख्या नहीं बढे इस विषयमें भोजका यह मत है ॥
वातजादि कुष्ठोंके लक्षण ।
खरं श्यावारुणं रूक्षं वातात्कुष्ठं सवेदनम् ॥ २४ ॥
पित्तात्प्रकुपितं दाहरागस्रावान्वितं स्मृतम् ।
कफात्क्लेदि घनं स्निग्धं सकण्डूशैत्यगौरवम् ।
द्विलिंगं द्वंद्वजं कुष्ठं त्रिलिंगं सान्निपातिकम् ॥ २५ ॥
वायुके योगसे कुष्ठ खरदरा, काले रंगका अथवा लालवर्ण रूखा और पीडा-
युक्त ऐसा होय है । पित्तके योगसे कुपित कुष्ठमें दाह, लाली और स्रावयुक्त
होय है । कफके योगसे क्लेदयुक्त, सघन, चिकना, खुजली, शीतलता युक्त और
भारी ऐसा होय है। द्वंदूज कुष्ठमें दो दोषोंके लक्षण होते हैं। सान्निपातिक कुष्ठमें
तीन दोषोंके लक्षण होते हैं ॥
१ दोषाः प्रदूष्य त्वङ्मांसं पाणिपादसमाश्रिताः । पिडिकां जनयंत्याशु दाहकण्डूसम-
न्विताम् ॥ दाल्यते त्वक् खरा रूक्षा पाण्योर्ज्ञेया विचर्चिका ॥ पादे विपादिका ज्ञेया स्थाना-
न्यत्वाद्विचर्चिका ॥