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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 404 में से

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पृष्ठ 275

भाषाटीकासमेत । (२५७)
रसादिसप्तधातुगत कुष्ठोंके क्रमसे लक्षण ।
त्वक्स्थे वैवर्ण्यमंगेषु कुष्ठे रौक्ष्यं च जायते ।
त्वक्स्वापो रोमहर्षश्च स्वेदस्यातिप्रवर्तनम् ॥ २६ ॥
रसधातुगत कुष्ठ होनेसे अंगका वर्ण पलट जाय है, अंग रूखा होय, त्वचा
शून्य होय, रोमाञ्च हो और पसीना बहुत आवे ॥
रक्तगत कुष्ठके लक्षण ।
कण्डूर्विपूयकश्चैव कुष्ठे शोणितसंश्रये ॥ २७ ॥
रक्तगत कुष्ठमें खुजली और राध बहुत होय ॥
मांसगत कुष्ठके लक्षण ।
बाहुल्यं वक्त्रशोषश्च कार्कश्यं पिडिकोद्गमः ।
तोदः स्फोटः स्थिरत्वं च कुष्ठे मांससमाश्रिते ॥ २८ ॥
मांसगत कुष्ठ होनेसे मुख बहुत सूखे, अंगमें कर्कशपना होय, देहमें फुन्सी पैदा
होय, सुई नोचनेकीसी पीडा होय, फोडे होयँ वे बहुत दिन रहें ॥
मेदोगत कुष्ठके लक्षण ।
कौण्यं गतिकक्षयोऽङ्गानां संभेदः क्षतसर्पणम् ।
मेदःस्थानगते लिङ्गं प्रागुक्तानि तथैव च ॥ २९ ॥
मेंदमें कुष्ठ होनेसे कौण्य कहिये हाथ गिरपडे, चलनेकी शक्ति मारी जाय
हडफूटन होय, घाव फैल जाय और पूर्वोक्त लक्षण (रसरक्तमांसगतकुष्ठके
लक्षण) होयँ ॥
अस्थिमज्जागत कुष्ठके लक्षण ।
नासाभंगोऽक्षिरागश्च क्षतेषु कृमिसंभवः ।
स्वरोपघातश्च भवेदस्थिमज्जासमाश्रिते ॥ ३० ॥
अस्थि (हड्डी) और मज्जागत कुष्ठ होनेसे नाक गिरपडे, नेत्र लाल होयँ, घावमें
कीडे पड जाँय, स्वर बैठ जाय ये लक्षण होयँ ॥
शुक्रार्त्तवगत कुष्ठके लक्षण ।
दंपत्योः कुष्ठबाहुल्याद्दुष्टशोणितशुक्रयोः ।
यदपत्यं तयोर्जातं ज्ञेयं तदपि कुष्ठितम् ॥ ३१ ॥
जिन स्त्रीपुरुषोंके रुधिर शुक्र कुष्ठाधिक्यसे दुष्ट होयँ, उस दुष्ट हुए वीर्य और
रजसे प्रगट भई जो सन्तान सो भी कोढ़ी होती है, इस जगह दुष्टहुए शुक्र और
१ त्वक्शब्देनात्र रसोऽभिधीयते धातुप्रस्तावात् त्वक्शब्देन रसस्याभिधानं तात्स्थ्यात्
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