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सर्वकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 273, कुल 404 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 273

भाषाटीकासमेत । (२५५)
किटिभकुष्ठ नीलवर्ण, व्रणकी चटके समान कठोर स्पर्श मालूम होय और परुष
कहिये रूक्ष होय ॥
वैपादिककुष्ठके लक्षण ।
वैपादिकं पाणिपादस्फोटनं तीव्रवेदनम् ॥ १९ ॥
वैपादिक जिसमें हाथ और पैर फटजायँ और पीडा बहुत होय, इस विपा-
दिकाको बिवाई नहीं जानना, क्योंकि बिवाई केवल पैरमें ही होती है और बिवा-
ईको शास्त्रमें पाददारी कहते हैं और विपादिकामें हाथ पैरोंमें फुन्सी श्यामरंगकी
होती हैं और वे फुन्सी चुचाती हैं तथा खुजाती हैं, इसीसे पाददारी भिन्न और
विपादिका भिन्न है ॥
अलसकुष्ठके लक्षण ।
कण्डूमद्भिः सरागैश्च गण्डैरलसकं चितम् ।
खुजलीयुक्त और लाल फफोलोंसे व्याप्त जो कुष्ठ हो उसको अलसककुष्ठ
कहते हैं ॥
दद्रुमण्डलकुष्ठके लक्षण ।
सकण्डूरागपिटिकं दद्रुमण्डलमुद्गतम् ॥ २० ॥
दद्रुमण्डलकुष्ठ इसमें खुजली होय, लाल होय और फोडा होय और ये ऊंचे उठ
आवें मंडलके आकार गोल उत्पन्न होय, इसीसे इसको दद्रुमंडल कहते हैं ॥
चर्मदलकुष्ठके लक्षण ।
रक्तं सशूलं कंडूमत्स्फोटं यद्दलत्यपि ।
तच्चर्मदलमाख्यातमस्पर्शसहमुच्यते ॥ २१ ॥
चर्मदलकुष्ठ यह लाल हो, शूलयुक्त, खुजलीयुक्त, फफोलोंसे व्याप्त होकर
फूटजाय, इसमें हाथ लगानेसे सहा न जाय, इसमें त्वचा फटजाय ॥
पामाकुष्ठके लक्षण ।
सूक्ष्मा बह्वयः पीडिकाः स्राववत्यः
पामेत्युक्ताः कण्डुमत्यः सदाहाः ।
पामाकुष्ठ पिडिका छोटी और बहुत होयँ उनमेंसे स्राव होय तथा खुजली चले
और दाह होय इस कुष्ठको पामा (खाज) कहते हैं ॥
कच्छुकुष्ठके लक्षण ।
सैव स्फोटैस्तीव्रदाहैरुपैता
ज्ञेया पाण्योः कच्छुरुग्रा स्फिचोश्च ॥ २२ ॥
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