लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५८ ) लीलावती ।
अन्वयः-इष्टस्य वर्गवर्गः घनश्च तौ अष्टसंगुणौ कुर्यात् । तदा राशी स्याताम् ।
प्रथमः सैकः राशिः स्यात् । एवं व्यक्ते अथवा अव्यक्ते वर्गकर्म कुर्यात् ॥ १४ ॥
अर्थः-इष्ट मानकर उसका वर्ग करनेसे जो राशि हो उसका फिर वर्ग करें
और उसी इष्टका एक जगह घन करें फिर वर्ग वर्ग और घन दोनोंको आठ ८ से
गुणा करे तब दो २ राशि होते हैं. प्रथम अर्थात् वर्ग वर्ग अष्टसे गुणितमें एक
जोडनेसे प्रथम राशि होता है. द्वितीय तो घन करनेसे आठ ८ से गुणा करनेसे ही
हो जाता है. इसी प्रकार पाटीगणित अथवा बीजगणितमें वर्गकर्म्म करे ॥ १४ ॥
इष्टम् १/२ अस्य वगवर्गः १/१६ अष्टघ्नः १/२ इसको जात: प्रथमो
राशिः ३/२ पुनरिष्टम् १/२ अस्य घनः १/८ अष्टगुणो जातो
द्वितीयो राशिः १/१ एवं जातौ राशी ३/२ १/१ अथैकेनेष्टेन
९ । ८ द्विकेन १२९ । ६४ त्रिकेन ६४९ । २१६ ॥
इष्ट १/२ आधेको माना इसका वर्ग किया तब १/४ ऐसा हुआ, फिर इसका
वर्ग किया तब १/१६ ऐसा हुआ, इसको आठसे गुणा किया तब ८/१ १/१६ आठका
परिवर्तन देनेसे गुणनफल १/२ यह हुआ. इसमें एक जोडा तब १/२ + १/१ = १/२
- २/२ = ३/२ यह प्रथम राशि हुई. फिर इष्ट १/२ का घन किया तब १/८ ऐसा
रूप हुआ इसको आठ ८ से गुणा किया तब ८/१ १/८ ऐसा होनेपर ८ आठका
परिवर्तन दिया तब गुणनफल १/१ यह हुआ. यही द्वितीय राशि है. दोनों राशि
३/२ १/१ यह हुए.
जब १ एकको इष्ट माना तब एकका वर्ग वर्ग १ एक ही हुआ. इसको ८
आठसे गुणा किया तब ८ आठ हुए. इसमें १ एक जोडनेसे प्रथम राशि ९ नौ हुई.
फिर १ एकका घन किया तब एक ही रहा. इसको आठसे गुणा किया तब ८ आठ
हुए. यही द्वितीय राशि है. इस प्रकार ९।८ यह दोनो राशि हुए.
जब दोको इष्ट माना तब दो २ का वर्ग वर्ग सोलह हुआ. इसको ८ आठसे
गुणा किया तब १२८ एकसौ अट्ठाईस हुए. उसमें एक जोडा तब १२९ यही
प्रथम राशि हुई. फिर इष्ट २ दोका घन किया तब ८ आठ हुई. इसको आठसे
गुणा किया तब ६४ चौंसठ हुई. यही द्वितीय राशि है. इस प्रकार दोनों राशि
१२९।६४ यह हुए.
जब तीनको इष्ट माना तब ३ तीनका वर्ग वर्ग ८१ इक्यासी हुआ इसको
आठ ८ से गुणा किया तब ६४८ छहसौ अडतालीस हुए. इसमें एक जोडा
तब ६४९ छहसौ उनचास हुए. यही प्रथम राशि है. फिर इष्ट तीन ३ का घन
किया तब २७ सत्ताईस हुआ. इसको आठ ८ से गुणा किया तब २१६
दोसौ सोलह हुआ. यही दूसरी राशि है. इस प्रकार दोनों राशि ६४९। २१६
यह हुए ॥