लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रयविक्रयव्यवहारः । (८९)
तर्हि तान् एककषोडशाष्टकमितैः भागैः मे निष्केण देहि । यतः अहं धूप
चिकीर्षामि ॥ २ ॥
अर्थः-हे अपनी माताको आनन्द देनेवाले वैश्यकुमार ! यदि सुन्दर कर्पूर एक
पल २ दो निष्कका मिलता है और चन्दन एक पल द्रम्मके आठवें भाग १/८
का मिलता है और अगर १/२ आधा पल द्रम्मके आठवें भागमें मिलता है तो
इन सब वस्तुओंको अर्थात् कपूर १ एक भाग चन्दनके १६ सोलह भाग अगरके
८ आठ भाग एक निष्कसे मुझको दो क्योंकि मुझको धूप करनेकी इच्छा है
॥ २ ॥ (यहां बताओ कि, तीनों चीजें तोलमें कितनी २ मिलेंगी और उनका
अलग २ क्या मोल होगा ? )
न्यासः-पण्यानि १/१ १/१ १/२ मूल्यानि ३२/१ १/८ १/८
भागाः १/१ १६/१ ८/१ मिश्रधनम् द्रम्माः १६
लब्धानि कर्पूरादीनां मूल्यानि १४ २/६ ६/६ ६/६
तथैव तेषां पण्यानि ७/१६ ७/१६ ३/२ ॥
फैलाव- कर्पूर. चन्दन. अगर. मिश्रधन
मोल ३२/१ भाग १/१ मोल १/८ भाग १६/१ मोल १/८ भाग ८/१ १६
पल १/१ पल १/१ पल १/२
यहाँ अपने २ मूल्यको अपने २ भागोंसे उपरोक्त रीति के अनुसार गुणा किया
अर्थात् कर्पूरके मूल्य ३२/१ का अपने भाग १/१ स गुणा किया तब ३२/१ ऐसा रूप
हुआ. फिर चन्दनके मूल्य १/८ को अपने भाग १६/१ स गुणा किया तब २/१ ऐसा
रूप हुआ और अगरके मूल्य १/८ का अपने भाग ८/१ से गुणा किया तब ८/६४ ऐसा
रूप हुआ. इस प्रकार तीनोंके मूल्योंको अपने २ भागोंसे गुणा करनेसे ऐसा
३२/१ २/१ १/१ रूप हुआ. इनमें अपनी २ तोलका भाग लिया अर्थात् ३२/१ में अपनी
तोल १/१ का भाग लिया तब ३२/१ ऐसा रूप हुआ. २/१ में अपनी तोल १/१ का
भाग लिया तब २/१ ऐसा स्वरूप हुआ. १/१ में अपनी तोल १/२ का भाग
देनेसे २/१ ऐसा रूप हुआ. इस प्रकार तीनों राशिमें अपनी २ तोलका भाग देनेसे
३२/१ २/१ २/१ ऐसा स्वरूप हुआ, इनको दो जगह अलग २ लिखा, एक जगह
तीनों राशिका योग कर लिया और एक जगह वैसा ही रहने दिया.
जहाँ योग किया वहा ३६/१ ऐसा रूप हुआ, फिर बिना योग करी हुई जो राशि
१ ३२/१ २/१ २/१ ह उनको मिश्रधन १६/१ द्रम्मसे अलग २ गुणा किया, तब ५१२/१ ३२/१ ३२/१
ऐसा रूप हुआ, इनमें ऊपर जो योग ३६/१ कर आये हैं उसका अलग २ भाग लिया.