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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 268 में से

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पृष्ठ 104

$\frac{७}{९}$ $\frac{७}{१८}$ अत्र तण्डुलमूल्ये पणौ २ काकिण्यौ २
वराटकाः १३ $\frac{१}{३}$ मुद्गमूल्ये काकिण्यौ २ वराटकाः ३ $\frac{२}{३}$ ॥
फैलाव-अपने २ मूल्यों $\frac{१}{१}$ $\frac{१}{१}$ को अपने २ भागों $\frac{२}{१}$ $\frac{१}{१}$ से गुणा किया
अर्थात् चावलोंके मूल्य $\frac{१}{१}$ को चावलोंके भाग $\frac{२}{१}$ से गुणा किया तब $\frac{२}{१}$ ऐसा
रूप हुआ और मूंगके मूल्य $\frac{१}{१}$ को मूंगके भागसे $\frac{१}{१}$ गुणा किया तब $\frac{१}{१}$
ऐसा रूप हुआ. इस प्रकार अपने २ मूल्यको अपने २ भागोंसे गुणा करनेपर $\frac{२}{१}$
$\frac{१}{१}$ ऐसा रूप हुआ. अब इनमें अपनी २ तोलका भाग दिया अर्थात् $\frac{२}{१}$ में चाव-
लोंकी तोल $\frac{३}{१}$ का भाग दिया तब $\frac{२}{३}$ ऐसा रूप हुआ और $\frac{१}{१}$ में मूंगकी तोल
$\frac{२}{१}$ का भाग दिया तब $\frac{१}{२}$ ऐसा रूप हुआ, इस प्रकार दोनों स्थानोंमें भाग देनेसे
$\frac{२}{३}$ $\frac{१}{२}$ ऐसा रूप हुआ. इनको दो जगह लिखा फिर एक जगह लिखा फिर एक
जगह दोनों $\frac{२}{३}$ $\frac{१}{२}$ राशियोंका योग कर लिया और एक जगह वैसा ही रहने दिया.
जहां योग किया वहां $\frac{७}{६}$ ऐसा रूप हुआ, बिना योग किये हुए दोनों राशियों $\frac{२}{३}$
$\frac{१}{२}$ को मिश्रधन $\frac{१३}{८}$ से गुणा किया तब $\frac{५२}{२४८}$ $\frac{१६}{१२१}$ ऐसा रूप हुआ. इन दोनों
राशियोंमें पहले जो योग $\frac{७}{६}$ कर आये हैं, उसका भाग लिया तो क्रमसे लब्धि
हुआ $\frac{७}{९}$ $\frac{७}{१८}$ यह क्रमसे चावल और मूंगका द्रम्मरूप मोल हुआ, अर्थात् २ दो
भाग चावलका मोल दो २ पण २ काकिणी १३ तेरह वराटक और वराटकका
तृतीयांश $\frac{१}{३}$ हुआ और एक भाग मूंगका मूल्य २ दो काकिणी ६ छ वराटक
और दो वराटकका तीसरा भाग $\frac{२}{३}$ हुआ, फिर उपरोक्त रीति के अनुसार चावल
और मूंगके भागों $\frac{२}{१}$ $\frac{१}{१}$ को मिश्र धन $\frac{१३}{६४}$ से गुणा किया तो हुए $\frac{२६}{६४}$ $\frac{१३}{६४}$ इनमें
ऊपर जो योग $\frac{७}{६}$ किया था उसका भाग लिया तब क्रमसे चावल और मूंग तोलमें
$\frac{७}{१२}$ $\frac{७}{२४}$ मान मिलेगा ॥

उदाहरणम्-
दूसरा उदाहरण-
कर्पूरस्य वरस्य निष्कयुगलेनै कं पलं प्राप्यते
वैश्यानन्दन चन्दनस्य च पलं द्रम्माष्टभागेन चेत् ॥
अष्टांशेन तथाऽगुरोः पलदलं निष्केण मे देहि तान्
भागैरेककषोडशाष्टकमितैर्धूपं चिकीर्षाम्यहम् ॥ २ ॥
अन्वयः- हे वैश्यानन्दन ! चेत् वरस्य कर्पूरस्य एकं पलं निष्कयुगलेन प्राप्यते ।
चन्दनस्य च पलं द्रम्माष्टभागेन प्राप्यते । तथा अष्टांशेन अगुरोः पलदलं प्राप्यते