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सर्वकोश
ललिता सहस्रनाम: सौभाग्यभास्कर भाष्य (भास्करराय मखी प्रणीत मूर्धन्य शाक्त भाष्य)

ललिता सहस्रनाम: सौभाग्यभास्कर भाष्य (भास्करराय मखी प्रणीत मूर्धन्य शाक्त भाष्य)

Lalita Sahasranama with Saubhagya Bhaskara Commentary

भास्करराय मखी (सम्पादक: वासुदेव लक्ष्मण पणशीकर) द्वारा

DevanagariSanskritpublished272 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 272 में से

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पृष्ठ 11

द्धृष्टालौकिकगुणगणस्तत्रतत्र महान्तं संमानमर्जयन्"
Wait, in line 24: is it 'परिश्रमन्' or 'परिभ्रमन्'?
Look at the second letter:
Line 22 has 'परिभ्रममाणस्यासेतोरा'.
In line 24: 'प', 'रि', then 'भ्र' or 'श्र'?
Look at the loop: it has 'भ्र'! Compare with 'भ्र' in 'परिभ्रममाणस्य' (line 22). It's 'परिभ्रमन्'!
Line 25: "श्रीभगवतो विश्वनाथस्य पुरीं वाराणसीमाससाद। यत्र श्रीभागीरथी निजावासप्राणि-"
Line 26: "निकायfilter/आनवरतं" -> "निकायfilter" no: "निकायfilter" is nonsense, let's read: "निकायfilter" -> "निकायfilter"?
Wait, look at line 26:
नि - का - या - न - न - व - र - तं = "निकायfilter"? No!
नि-का-या-न-न-व-र-तं = "निकायfilter"?! No, it is:
नि (ni)
का (kā)
या (yā)
न (na)
न (na)
व (va)
र (ra)
तं (taṁ)
= "निक