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सर्वकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ३१ )
for painting of the lower lip and playing with the
ball.
CHANGE OF VOICE:— सा विसृष्टरागात् अधराद् स्तनाङ्ग-
रागारुणितात् कन्दु‌कात् च निवर्तितं करं कुशाङ्कुरादान-
परिक्षताङ्गुलि अक्षसूत्रप्रणयिनं च कृतवती ॥ ११ ॥
HINDI TRANSLATION:— छूट गया है रंगना जिसका ऐसे
ओठ (के रंगने) से तथा स्तनों के अङ्गलेप से लाल हुई गेंद
(के खेलने) से निवृत्त हुए हाथ को उसने कुश के अङ्कुरों के
काटने से घायल अंगुली वाला और रुद्राक्ष की माला से प्रेम
करने वाला (जपने वाला) बना दिया ॥ ११ ॥
ENGLISH TRANSLATION — The hand, which was
turned away from her lower lip, the painting of which
had been given up, and from the ball reddened by the
unguent of her breasts, was made by her such as the
fingers of which were pricked by plucking the tender
blades of kusha grass (and) the friend of the rosary
of Aksha beads 11
PURPORT IN SANSKRIT:— पूर्वं तु पार्वती स्वशरीरशोभार्थे
स्वकरेणाधरे लाक्षारसादिरागलेपमकार, मनोविनोदार्थञ्च
कन्दुकेन चिक्रीड । तपःकाले तु तयाधररञ्जनं कन्दुकक्रीडनञ्च
परित्यक्तमतः स्वकरमनयोरप्रयुज्य तेन पूजार्थं हरिणानां भक्षणार्थं
च कुशानां लवनञ्चकार, येन तस्या अङ्गुलयो व्रणयुक्ताः जाताः,
अपरञ्च सा तेन करेणानिशं रुद्राक्षमालया जजाप ॥ ११ ॥
महार्हशय्यापरिवर्तनच्युतैः
स्वकेशपुष्पैरपि या स्म दूयते ।
अशेत सा बाहुलतोपधायिनी
निषेदुषी स्थण्डिल एव केवलम् ॥ १२ ॥