कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary
महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा
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Change of Voice —प्रभिन्नदिग्वारणवाहनेन वृष्णा उप-
गम्य असम्पद् वृषेण गच्छन् तस्य पादौ मौलिना विनिद्रमन्दार-
रजोरुणाङ्गुली क्रियेते ॥ ८० ॥
Hindi Translation —किसी प्रकार की सम्पत्ति न
रखने वाले, बैल पर चढ़ने वाले, उस ( शिव ) के पैरो को, मद
बहाने वाला ( पूर्व ) दिशा का हाथी जिसकी सवारी है ऐसा इन्द्र
समीप आकर अपने सिर द्वारा, खिले हुए देववृक्षों के पुष्पों के
पराग से लाल अङ्गुली वाला करता है ॥ ८० ॥
English Translation —Indra, whose vehicle is the
rutting elephant of the ( eastern ) quarter, coming
near, makes with his head the feet of him who is
wealthless and who rides a bull, possessing toes
( made ) red by the pollen-dust of the full blown flowers
of the heavenly trees 80-
Purport in Sanskrit —यद्यपि स शिव स्वयं निर्धनो
वृद्धोक्षवाहनश्च परं जगत्यसाधारणैश्वर्यवान् मघवापि यस्य हि
हस्तिराज ऐरावतो वाहनं तत्समक्षमागत्य सत्कारप्रदर्शनार्थं स्वर्ग-
वृक्षपुष्पभूषितं स्वशिरस्तच्चरणयोर्नमयति येन शिवस्य पादाङ्गु-
लयः पुष्परागेण रागयुक्ता भवन्ति । यस्य हि इन्द्रादयोऽपि चरण-
सेवका स कियन्महानिति कथनेनास्ताम् ॥ ८० ॥
विवक्षता दोषमपि च्युतात्मना
त्वयैकमीशं प्रति साधु भाषितम् ।
यमामनन्त्यात्मभुवोऽपि कारणं
कथं स लक्ष्यप्रभवो भविष्यति ॥ ८१ ॥