सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 268 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 123

( १०४ )
not strangers to each other, and so he was entitled
to make further enquiries about her. 39.
CHANGE OF VOICE :—आत्मना प्रयुक्तसत्कारविशेषः अहं
परः संप्रतिपत्तुं न अर्ह्ये, ( हे ) संनतगात्रि, यतः मनीषिणः सतां
सङ्गतं साप्तपदीनं ब्रुवन्ति ॥ ३६ ॥
HINDI TRANSLATION :—( तुमने ) अपने आप जिसका
विशेष आदर किया है ऐसे मुझ को कोई दूसरा (अज़नबी)
मानना योग्य नहीं है, क्योंकि, हे सुन्दरि, बुद्धिमान् लोग सज्जनो
की मित्रता को सात शब्दों के बोलने (या पैरों के चलने) से होने
वाली कहते हैं ॥ ३६ ॥
ENGLISH TRANSLATION —It does not behove thee
to regard me as a stranger, to whom special hospitality
has been accorded by thee, for, O one of stooping
body, the friendship of good people is declared by
the wise to be formed after seven words have been
exchanged between them (or, after seven steps have
been walked together) 39
PURPORT IN SANSKRIT :—हे सुन्दरि, अहमत्रागतस्त्वया
यथाविधि सत्कृतः त्वया सह मे वार्त्तालापश्च जातः, अतोऽहं
त्वदीयो जनो जातः । अधुना त्वयाहं स्वमित्रमेव मन्तव्यः, यतः
सज्जनानां मैत्री परस्परं सप्तपदोच्चारणेन सप्तपदगमनेन वा सिध्य-
तीति विद्वज्जनानां सम्मतिः । इदानीं तव मित्रत्वान्मे तव हार्दिकी-
मिच्छां ज्ञातुमधिकारोऽस्तीति भावः ॥ ३६ ॥
अतोऽत्र किञ्चिद्भवतीं बहुक्षमां
द्विजातिभावादुपपन्नचापलः ।