कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Kularnava Tantra with Hindi Commentary
भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ
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-२८ हिन्दी कुलार्णव
पापरूपी पशु को ज्ञानरूपी खड्ग से मारकर मन से इन्द्रियों
को आत्मा में संयुक्त कर चित्त को परतत्त्व में लगानेवाला
योगी मांसभोजक है। शेष लोग तो प्राणिहिंसक मात्र हैं।
शक्तियों का जो सेवक योगी परशक्ति और अपनी आत्मा के
संयोग से होनेवाले आनन्द का अनुभव करता है, वही मैथुन
का मर्मज्ञ है। अन्य लोग तो स्त्री सेवी मात्र हैं। इस प्रकार
गुरु मुख से पाँचों द्रव्यों की भावना जानकर जो साधना करता
है, वह मुक्त होता है।
यह मैंने संक्षेप में तुमसे कहा। अब हे कुलेशादि ! तुम
क्या सुनना चाहती हो ?