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सर्वकोश
क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics

क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा

DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ

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८ क्षेमकुतूहलम्
तृतीय उत्सव में वैद्य तथा पाचक के गुण, विरुद्धाहार, अध्यशन तथा विषमाहार
का वर्णन किया गया है॥२५॥
चतुर्थ उत्सव में ऋतु लक्षण तथा ऋतुचर्या का वर्णन किया गया है। पंचम
उत्सव में प्रातःकाल से रात्रिकाल (अर्ध प्रहर) तक का के काल में वाञ्छित कर्म का
वर्णन किया गया है॥२६ १/२॥
षष्ठे भोक्ताऽशनं भूरि क्रमश्च परिवेषणे ॥ २७ ॥
भोजनाहार्ण्यमत्राणि पटुश्च परिवेशकः।
दृष्टिदोषहराः श्लोका नानावर्णकरो विधिः ॥ २८ ॥
मांसानां बहुधा पाकपरिचर्या निगद्यते ।
षष्ठे (छठे) उत्सव में भी का (भोजन करने वाले), भोजन, परिवेषण (भोज
परोसना), भोजन के अयोग्य, चतुर, उत्तम परिवेशक, दृष्टिदोष दूरीकरण, मन्त्र, वर्ण
निर्माण तथा मांस पाक का वर्णन किया गया है॥२७-२८ १/२॥
सप्तमोत्सवके प्रोक्तं मत्स्यमांसस्य रन्थनम् ॥ २९॥
षड्विधानां तु शाकानामुच्यतेऽष्टमके विधिम्।
सप्तम उत्सव में मत्स्य मांस विधि का वर्णन से। अष्टम उत्सव में छह प्रकार के
रसकों का पाक का) वर्णन किया गया है॥२९ १/२॥
नवमोत्सवके ख्याताः सन्धानवटिका वटाः ॥ ३० ॥
चाणका मौद्गसंस्कारा बहुधा माषपिष्टजाः।
नवम उत्सव में संधान वटिका, चणक, वटक, मुद्ग तथा माषपिष्ट की निर्मित
अनेक प्रकार के आहार योग्य का समावेश किया गया है॥३० १/२॥
दशमोत्सवके प्रोक्तः पक्वान्नस्योत्तमो विधिः ॥ ३१ ॥
अन्नमांसफलक्षीरकन्दमीनादिभिः कृताः।
दशम उत्सव में अन्न, मांस, फल, दुग्ध, कन्द एवं मत्स्य निर्मित उत्तम व्यंजन
निर्माण विधि का समावेश किया गया है॥३१ १/२॥
उत्सवैकादशे प्रोक्ताः प्रलेहाश्च सुसट्टकाः ॥ ३२ ॥
अभिष्यन्दनकल्काश्च सुसुप्ताग्निप्रबोधकाः ।


प्रथमोत्सवः ९
एकादश उत्सव में प्रलेह, सट्टक, अभिष्यन्दन कल्क तथा सुप्ताग्नि प्रदीपक
आहार का समावेश किया गया है॥३२ १/२॥
द्वादशोत्सवके प्रोक्तं क्षीरं च पानकम् ॥ ३३ ॥
वाताधिका रसाला च सुशीतं च करम्भकम्।
शुद्धदुग्धस्य पानं तु खाडवाचमनोदकम् ॥ ३४ ॥
इषीकोच्छिष्टदानस्य वाक्यमार्थमहोदितम् ।
धूपचन्दनताम्बूलमजीर्णोपशमौषधम् ॥ ३५ ॥
किञ्चिदुद्देशमात्रेण प्रोक्ता ग्रन्थेमया क्रमः।
द्वादश उत्सव में क्षीरी, क्षीर, पानक, सुगन्धित रसाला, शीतल करम्भक,
दुग्धपान, रसाला, षाडव, आचमन, इषिका से उच्छिष्ट अंश निष्कासनमर्थ मात्र
(काव्य) आदि का वर्णन है तथा एवं धूप चन्दन सम्यक अजीर्ण निवारक औषधियों का
समावेश किया गया है॥३३-३५ १/२॥
भक्ष्यं भोज्यं लेह्यपेयमित्याहारचतुष्टयम् ॥ ३६ ॥
मधुरादिरसोपेतं क्रियते तद्विवेचनम्।
भर्जनं तलनं स्वेदः पाचनं क्वथनं तथा ॥ ३७॥
तान्दूरं पुटपाकश्च पाकः सप्तविधो मतः।
भोजन के प्रकार- १. भक्ष्य
२. योज्य (मधुरादि (षष्ठ) रसों से युक्त
३. लेह्य चतुर्विध आहार)
४. पेय
सात प्रकार के पाक- १. भर्जन ५. क्वथन
२. तलन ६. तान्दूर
३. स्वेदन ७. पुटपाक
४. पाचन
सर्वव्यंजन योगार्थ द्रव्य
हिङ्गु तैलं च लवणं पानीयं व्यञ्जनेऽखिले ॥ ३८ ॥
अनुक्तमपि दातव्यं पारम्पर्याभियोगतः ।