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सर्वकोश
क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics

क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा

DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिका.
मूल पाठ प्रारम्भ श्लोक संख्या
१. प्रथमोत्सव : प्रथम प्रकरण १-६२
२. द्वितीयोत्सव : द्वितीय प्रकरण १-४०
३. तृतीयोत्सव : तृतीय प्रकरण १-५२
४. चतुर्थोत्सव : चतुर्थ प्रकरण १-३८
५. पंचमोत्सव : पंचम प्रकरण १-९४
६. षष्ठोत्सव : षष्ठम प्रकरण १-२१४
७. सप्तमोत्सव : सप्तम प्रकरण १-३६
८. अष्टमोत्सव : अष्टम प्रकरण १-२०७
९. नवमोत्सव : नवम प्रकरण १-५६
१०. दशमोत्सव : दशम प्रकरण १-१४४
११. एकादशोत्सव : एकादश प्रकरण १-२९
१२. द्वादशोत्सव : द्वादश प्रकरण १-१२७
श्रीक्षेमशर्मकृतं
क्षेमकुतूहलम्
हिन्दोव्याख्याविभूषितम्
अथ प्रथमोत्सव
मङ्गलाचरणम्
कपोलतलनिर्गतप्रमदवारिधारालुठद्
भ्रमद्भ्रमरकाकलीकलितमञ्जुकोलाहलः।
गिरीशतनयो गुरुः सकलसिद्धिवारान्निधि-
र्भिनत्तु दुरितानि नः सततमोदकादः सदा ॥ १ ॥
गणेश प्रार्थना
भ्रमर जो कपोल तल निर्गत (कपोल तत से निर्गत) मदवारि धारा मद्ययुक्ता जल
में लौटते हुए (लठद्) जो मधुर (मंजिल) कोलाहल (शोर-गुल) करते हुए, सकलसिद्धि
निधि होती (समस्त प्रकार की सिद्धियों का भण्डार खजाना) प्रदाता, नव सकल मोदक
(सदैव मोदक/ लड्डू खाकर आनन्ददाता), सकल गुरु (सबके गुरु) तथा गिरीश तनय
(भगवान शंकर/ महादेव) के सुपुत्र श्रीमान् गणेश भगवान् की प्रार्थना (स्तुति/अर्चना)
करते हैं, जिससे हमारे समस्त प्रकार के पापों से निवृत्ति (भिन्दतु दूरितानि) करने की
कृपा करें ॥१॥
हृदयभुजविशालः कण्ठमन्दारमालः
समरभुवि करालः शोचिषा शोभिभालः।
दनुजनिचयकालः सर्वलौकैकपालः
स जयति मतिशालश्छद्मगोपालबालः ॥ २ ॥
श्रीकृष्ण प्रार्थना
हृदय गुणा विशाल (विस्तीर्ण/ विशाल) हृदय तथा भुजा (बाहुओ) युक्त, कण्ठ
मन्दार माला विभूषित (गले में मन्दार पुष्पों की माला धारण किए हुए, युद्ध के समय