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सर्वकोश
क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

क्षेमकुतूहलम् (क्षेमशर्मा - १६वीं शती का शाही पाकशास्त्र एवं आहार-विज्ञान सटीक)

Kshemakutuhalam of Kshemasharma on Dietetics

क्षेमशर्मा (सम्पादक: चौखम्बा संस्कृत संस्थान) द्वारा

DevanagariSanskritpublished136 पृष्ठ

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पृष्ठ 104

बनाकर, दुग्ध की पिष्टी से पूरित कर, घृत में पाक कर लेते हैं। इस रीति से 'कृशराग
गर्भक' पदार्थ प्रस्तुत होता है॥६७॥
अथ क्षीरदलनिर्माणविधिः
घनं दुग्धं घृतभृष्टं क्षीरे पिहितरन्धितम्।
कटाहे तु बहिः खण्डप्रलिप्तं क्षीरजं दलम्॥६८॥
क्षीरदल
धन के दुग्ध (खोया) को घृत भृष्ट (घी में भून) कर दुग्ध में डालकर पाक करते
हैं। फिर कटाह (कढ़ाई) से बाहर निकालकर (वहिः) स्थापित कर, खण्ड प्रलिप्त
(चाशनी का लेप) करते हैं। यह 'क्षीरज़दल' प्रस्तुत होता है॥६८॥
अथ क्षीरशाकनिर्माणविधिः
विनष्टदुग्धं खण्डं च तलयेत्तप्तसर्पिषि।
तन्निर्द्रवं खण्डसमं क्षीरशाकमिदं स्मृतम्॥६९॥
क्षीरशाक
विनष्ट दुग्ध (छेना) के खण्ड (छोटे टुकड़े) कर, तप्त घृत में तलते हैं, फिर द्रव
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