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सर्वकोश
कृषि-पाराशर (महर्षि पराशर - प्राचीन भारतीय कृषि, मृदा-परीक्षण, वर्षा-पूर्वानुमान व बीज-संस्कार)

कृषि-पाराशर (महर्षि पराशर - प्राचीन भारतीय कृषि, मृदा-परीक्षण, वर्षा-पूर्वानुमान व बीज-संस्कार)

Krishi-Parashara of Maharshi Parashara

महर्षि पराशर (सम्पादक: गिरिजाप्रसन्न मजूमदार एवं सुरेशचन्द्र बनर्जी) द्वारा

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

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8 Index
वृष्टिमूला कृषिः 10 स एव विपरीतस्तु 76
वृष्टिर्मन्दा सदा 13 स एव रविणा 78
वैजयन्तीसमायुक्तो 217 सजला निर्जला 58
वैशाखशुक्लप्रतिपत् 48 सद्यो निकृन्तयेत् 77
वैशाखे करकाः 42 सद्यः करोत्यनावृष्टिं 75
वैशाखे वपनं 168 सन्ध्यायां तु 96
व्यतीपाते च 213 संग्रामो वात 21
शकाब्दं वह्नि 23 संपूज्याग्निं 133
शतयोजनविस्तीर्णा 26 सप्तपद्यां ततः 209
शनिभौमार्कवारेषु 94 सप्तम्यां खातित 41
शस्यचयः प्रतिपदि 125 संमार्जनीं च 91
शस्यवृद्धिःशकृत 151 समर्थेन कृषिः 82
शस्यवृद्धिकरो मार्गे 219 समं चैवाधिकं 50
शस्यध्वंसं प्रकुर्यात् 59 समुद्रे दश 29
शस्यसम्पत्तयेऽवश्यं 139 समपुष्पत्वमासाद्य 203
शस्यहानिर्भवेत् 17 समृद्धिं च परां 243
शाकं त्रिगुणितं 12 सर्वशुक्लस्तथा 141
शुक्रेन्दुजीव 122 सर्वविघ्नप्रशान्त्यर्थं 235
शुक्लपुष्पसमायुक्तं 135 सर्वा गोजातयः 104
शुक्लाषाढ्यां नवम्यां 61 सर्वे ते प्रशमं 230
शुभेऽर्के चन्द्र 130 सर्वे ते बन्ध्यतां 166
शेषं मेघं 23 सार्द्धं दिन 30
शेषे नीचैर्न 46 सार्द्धहस्तस्तु 113
शोभने दिवसे 109 सार्द्धद्वादश 115
शोषयेदातपे सम्यक् 157 सार्द्धमुष्टिद्वयं 211
श्रवणो जनितं 74 सिंहगेहे कृता 89
श्रावणे मासि 64 सिंहे सर्प 128
श्रावणो वाधमं 169 सुदृढं पुटकं 160
श्रेष्ठो मुष्टि 210 सुदृढा कृषकैः 119
श्लेष्मातकाग्रपुभाग 240 सुवर्णरौप्यमाश्रित्य 4