काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)

काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)
Kavyalankara of Acharya Bhamaha with Commentary
आचार्य भामह (सम्पादक: पण्डित देवेन्द्रनाथ शर्मा) द्वारा
DevanagariHindipublished230 पृष्ठ
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अर्थालंकाराः श्लो. | तृतीयः परिच्छेदः ।
- रूपकं 21-24 | (Pages 128 to 166) श्लो.
- दीपकं 25-29 | 13. प्रेयः 5
आदिदीपकं 27 | 14. रसवत् 6
मध्यदीपकं 28 | 15. ऊर्जस्वि 7
अन्तदीपकं 29 | 16. पर्यायोक्तं 8-9 - उपमा 30-65 | 17. समाहितं 10
१ प्रतिवस्तूपमा 34 | 18. उदात्तं 11-13
उपमादोषाः सप्त 39-65 | 19. श्लिष्टं 14-20
i. हीनता 41-46 | 20. अपह्नुतिः 21-22
ii. असंभवः 47-51 | 21. विशेषोक्तिः 23-24
iii. लिङ्गभेदः ⎫ | 22. विरोधः 25-26
iv. वचनभेदः ⎬ 52-57 | 23. तुल्ययोगिता 27-28
v. विपर्ययः ⎭ | 24. अप्रस्तुतप्रशंसा 29-30
vi. उपमानाधिकत्वं 58-62 | 25. व्याजस्तुतिः 31-32
vii. असदृशता 63-65 | 26. निदर्शना 33-34
अपरे षडलंकाराः 66-67 | 27. उपमारूपक 35-36 - आक्षेपः 68-70 | 28. उपमेयोपमा 37-38
- अर्थान्तरन्यासः 71-74 | 29. सहोक्तिः 39-40
- व्यतिरेकः 75-76 | 30. परिवृत्तिः 41-42
- विभावना 77-78 | 31. संसंदेहः 43-44
- समासोक्तिः 79-80 | 32. अनन्वयः 45-46
- अतिशयोक्तिः 81-85 | 33. उत्प्रेक्षावयवः 47-48
हेतुः सूक्ष्मः लेशश्च | 34. संसृष्टिः 49-52
अनलंकाराः 86-87 | 35. भाविकत्वं 53-54 - यथासंख्यं 89-90 | 36. आशिष् 55-57
- उत्प्रेक्षा 91-92 | उपसंहारः 58
- स्वभावोक्तिः 93-94 |