काव्यालङ्कार (आचार्य भामह - भारतीय काव्यशास्त्र एवं अलङ्कार-सिद्धान्त मूल महाग्रन्थ सटीक)
Kavyalankara of Acharya Bhamaha with Commentary
आचार्य भामह (सम्पादक: पण्डित देवेन्द्रनाथ शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंxii
चतुर्थः परिच्छेदः । | श्लो.
(Pages 167 to 171) श्लो. | प्रत्यक्षं 6-10
दोषोद्देशः 1-2 | अनुमानं 11
अपार्थं 3-8 | प्रतिज्ञा 12
व्यर्थं 9-11 | प्रतिज्ञाहीनं 13-20
एकार्थं 12-16 | हेतुहेत्वाभासौ 21-25
ससंशयं 17-19 | दृष्टान्ततदाभासाः 26-29
अपक्रमं 20-21 | न्यायविरुद्धं 30-34
शब्दहीनं 21-23 | काव्यप्रतिज्ञा 35-39
यतिभ्रष्टं 24-25 | प्रतिज्ञाभासः 40-46
भिन्नवृत्तं 26-27 | हेतुः 47-51
विसन्धि 28 | हेत्वाभासः 52-54
देशविरोधि 29-30 | दृष्टान्तः 55-68
कालविरोधि 31-32 |
कलाविरोधि 33-35 | षष्ठः परिच्छेदः ।
लोकविरोधि 36-38 | (Pages 179-185)
न्यायविरोधि 39-47 |
आगमविरोधि 48-50 | व्याकरणशास्त्रं 1-6
| शब्दविमर्शः 7-13
पञ्चमः परिच्छेदः । | अर्थविमर्शः 14-22
(Pages 172 to 178) | प्रयोज्याप्रयोज्यशब्दविचारः 23-30
| स एव अष्टाध्यायीक्रमेण 31-61
परिच्छेदार्थः 1-4 | पाणिनीयप्रशंसा 62-63
प्रमाणतद्विषयौ 5 | परिच्छेदषट्कार्थप्रदर्शनं 65-66