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सर्वकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

DevanagariHindipublished361 पृष्ठ

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दा पुत्रो जायते।"
Again, "कर्तव्यं ।"
"जायते।" - danda right after te.

विज्ञानकर्मेदं । सू० २० ।—यदि पुंनामधेयं स्पृशन्ति तदा कुमारो जायते ।
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"विज्ञानकर्मेदं । सू० २० ।—यदि पुंनामधेयं स्पृशन्ति तदा कुमारो जायते ।"
Wait, "पुंनामधेयं": प, ु, ं, न, ा, म, ध, े, य, ं = पुंनामधेयं.

कण्डिका ॥ ३४॥
Centered: "कण्डिका ॥ ३४॥"
Wait, does it have space between ३४ and ॥? "३४॥"

सू० १।—अथ वन्ध्याप्रजननकरणमुच्यते । सू० २। —ततो गृहे पुरोडाशं
Look at L22:
"सू० १।—अथ वन्ध्याप्रजननकरणमुच्यते । सू० २। —ततो गृहे पुरोडाशं"
Wait, is there space before the dash in सू० २। —? Yes, space, dash.

प्रसन्दं कटुपा अलंकारान्सम्पात्य प्रयच्छति । सू० ३।—अथ मृतापत्यायाः स्त्रिय-
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