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सर्वकोश
कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary

महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा

DevanagariSanskritpublished119 पृष्ठ

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180 Appendix II
कृणुष्व पाजः प्रसितिं न पृथ्वीम् VIII. 5.१७. RV. 4.4.1.
को नु वां मित्रावरुणावृतायन् XXIII. 6.१३. RV. 5.41.1.
क्राणा यदस्य पितरा मंहनेष्ठाः XXIII. 11.२४. RV. 10.61.1.
कस्य वीरः को अपश्यदिन्द्रम् XXI. 3.११. RV. 5.30.1.
XXIV. 5.१०. RV. 5.30.1.
XXVI. 8.५. RV. 5.30.1.
क्षयं पावकशोचिषः XXVI. 14.३०. RV. 3.11.7.
क्ष्मया वृधान ओजसा XXVI. 9.१५. (ŚŚ. 10.10.8.)
गणानां त्वा गणपतिं हवामहे VIII. 7.९. RV. 2.23.1.
IX. 6.११. RV. 2.23.1.
गवामिव श्रियसे शृङ्गमूत्तमम XXI. 3.३०. RV. 5.59.3.
गायत् साम नभन्यं यथा वेः XXIV. 5.१२. RV. 1.173.1.
XXVI. 13.१५. RV. 1.173.1.
गायन्ति त्वा गायत्रिणः XXIV. 6.७. RV. 1.10.1.
गिरः समझ्छे विदथेष्व्वाभुवः XIX. 6.३९. RV. 1.64.1.
गीर्भिर्वृधं वृषभं चर्षणीनाम् XXV. 5.१८. RV. 6.18.1.