कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
DevanagariSanskritpublished119 पृष्ठ
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182 Appendix II
तद् रूपा मिनन् तदपा एक ईयते XXV. ७.२३. RV. 2.13.3.
तनूषु शूराः सूर्यस्य सातौ XXV. २.१३. RV. 7.30.2.
तनूष्वप्सु सूर्ये XXV. ५.८. RV. 6.46.4.
तंतमिद् राधसे महे XX. ५.२. RV. 8.68.7.
तं त्वा यज्ञेभिरीमहे XXIII. २.१. RV. 8.68.10.
तपो ष्वग्ने अन्तराँ अमित्रान् VIII. ५.१५. RV. 3.18.2.
तमस्य द्यावापृथिवी सचेतसा XXVI. ४.९. RV. 10.113.1.
तमस्य राजा वरुणस्तमश्विना IX. ८.८. RV. 1.156.4.
तमिन्द्रं वाजयामसि XXIII. ५.३७. RV. 8.93.7.
तमीळिष्व यो अर्चिषा XXV. 14. १५. RV. 6.60.