कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)

कौषीतकि ब्राह्मण (शाङ्खायन ब्राह्मण - उदय प्रणीत व्याख्या सहित सटीक)
Kaushitaki Shankhayana Brahmana with Udaya Commentary
महर्षि कौषीतकि (टीकाकार: उदयसूरि) द्वारा
DevanagariSanskritpublished119 पृष्ठ
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(dhma)? Look at line 50:हविर्हविष्मो महि सध्म दैव्यमिति पुराहूतेः- wait,पुराहूतेःorपुराहुतेः? पुराहुतेः(purāhuteḥ) - before the offering! Line 51:प्रापणातू ॥२३॥ पुनर्हविष्मवेमवानं तदयतायामानं करोति ॥२४॥ सूयवसाद् भगवती हि भूयाWait, let's examine line 51 very carefully: First word:प्रापणातूorप्रापणात्? It is प्रापणात् ॥२३॥Next:पुनर्हविष्मवेमवानं? Wait! In Sanskrit: "पुनर्हविष्मत्त्वाद्यतायामं करोति" or "पुनर्हविष्मत्वेनावनातं"? Let's read the characters in line 51: पु (pu) न (na) र् (r) ह (ha) वि (vi) ष्म (ṣma) त्त्वे (ttve) न (na) Wait, look at it: पुनर्हविष्मत्त्वेनावनातंorपुनर्हविष्मत्वेनावयातयामं`?
Wait, what's the idiom? "अयातयामं करोति"!
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