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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

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पृष्ठ 358

विकारो ऽवयवो वा, दैवदारवम्। दाधित्थस्य, दाधित्थम्। पालाशस्य, पा-
लाशम्। शामीलस्य, शामीलम्। कापोतम्। औष्ट्रकस्य, औष्ट्रकम्। ऐणेयस्य,
ऐणेयम्। कांस्यस्य, कांस्यम्। पारशवस्य, पारशवम्। ञित इति किम्। बैल्व-
मयम्। तत्प्रत्ययादिति किम्। बैदमयम्॥
क्रीतवत्परिमाणात् ॥ १५६ ॥
प्राग्वतेष्ठजित्यत आरभ्य क्रीतार्थे ये प्रत्ययाः परिमाणाद्विहितास्ते वि-
कारे ऽतिदिश्यन्ते। परिमाणात् क्रीतवत् प्रत्यया भवन्ति तस्य विकार इत्येत-
स्मिन्विषये। अणादीनामपवादः। संख्या परिमाणग्रहणेन गृह्यते, न रूढिप-
रिमाणमेव। निष्केण क्रीतं, नैष्किकम्। एवं निष्कस्य विकारो, नैष्किकः।
शतेन क्रीतं, शत्यं, शतिकम्। शतस्य विकारः, शत्यः, शतिकः। साहस्रः।
व