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सर्वकोश
काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

काशिका वृत्ति (आचार्य वामन एवं जयादित्य - अष्टाध्यायी सूत्र-वृत्ति सम्पूर्ण सान्वय सटीक)

Kasika Vritti of Vamana and Jayaditya on Panini Sutras

आचार्य वामन एवं जयादित्य (सम्पादक: पण्डित बालशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished828 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 828 में से

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पृष्ठ 189

? In some editions: अयेगावा). Here the text clearly has अयेगावा ।
Then: विच् खल्वपि । रेडसि पथो न

  • Line 8:
    येः । अपिशब्दः सर्वोपाधिव्यभिचारार्थः । निरुपपदादपि भवति । धीवा ।
    "रेडसि पथो न येः" - Rigveda / Yajurveda: "रेडसि स्वधावान्... पथो न येः" (from या धातु with विच् -> येः).
    Then: अपिशब्दः सर्वोपाधिव्यभिचारार्थः । निरुपपदादपि भवति । धीवा ।

  • Line 9:
    पीवा । दृश्यग्रहणं प्रयोगानुसरणार्यम् ॥
    Wait, is it प्रयोगानुसरणार्यम् or प्रयोगानुसारार्थम्?
    Look at the text:
    प्रयोगानुसरणार्यम् - it has स र ण ा र्य म्! The letter is र्य! But wait, ण has ा? It looks like प्रयोगानुसरणार्यम् or प्रयोगानुसारार्थम्?
    Let's zoom in on line 9:
    प्र यो ग ा नु स र ण ार्य म् -> wait, look at ण:
    `