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सर्वकोश
करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

करणकुतूहलम् (भास्कराचार्य द्वितीय - सुमेध हिन्दी व्याख्या सहित पञ्चाङ्ग एवं ग्रह-गणित)

Karanakutuhalam of Bhaskaracharya with Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (टीकाकार: पं. रामचन्द्र पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished155 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 155 में से

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पृष्ठ 74

मोक्षशरः is in the other direction (उत्तर)?
"परः" = other! Or "पर उत्तरे"?
Wait, look at line 3: "उत्तराभूच्छायामानार्द्धम्"
Wait, does line 2 end with "परः"?
Let's look at the letters:
प + र + ः = परः
Wait, could it be "शरः"?
Look at 'प' in 'स्पर्श': exactly the same shape!
Yes, it is 'प'! So it is definitely "परः".

Let's check line 3:
"उत्तराभूच्छायामानार्द्धम् १४।११ मानार्द्धम् ८।३५ एवमत्र नि-"
Wait, is it "उत्तराभूच्छायामानार्द्धम्" or "उत्तरा भूच्छायामानार्द्धम्"?
There is no space, it's run together: "उत्तराभूच्छायामानार्द्धम् १४।११ मानार्द्धम् ८।३५ एवमत्र नि-"

Line 4:
"पुणेन विचार्य परिलेखो विधेयः। अथ ग्रस्तोदये चन्द्रस्पर्शनतायो-"

Line 5:
"दाहरणम् शके १५२८ भाद्रपदपूर्णिमायांशनौ २६।३३ अब्दाः"

Line 6:
"४२३ अधिमासाः १५७। अवमानि २४५९ अहर्गणः १५५६"
Wait, look after १५७: is it a