सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 259 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 113

३६६ ] [ कल्कि पुराण
स्त्रीणा मेव युयुत्सूना कथा श्रुत्वा महामति ।
कल्कि समुदित प्रायात्स्वसैन्यै सनुगो रथः ।१८।
ता. समालोक्य पद्मेश सर्वशस्त्रास्त्रधारिणी. ।
नानावाहनसारूढा कृतव्यूहा उवाच सः ।१६।
रे स्त्रिय शृणुतास्माक वचन पथ्यमुत्तमम् ।
स्त्रिया युद्धे न कि पु सा व्यवहारोऽत्र विद्यते ।२०।
वे म्लेच्छ स्त्रियाँ अपने पतियो को बाणो मे बिंधे हुए तथा व्या-
कुल देख कर उन्हे पीछे हटाती हुई हथियार लेकर कल्कि सेना से युद्ध
करने लगी ।१६। उन स्त्रियो को युद्ध मे तत्पर देख कर कल्कि-सेना
आश्चर्य में पड़ गई और उसने कल्कि जी के समक्ष जाकर उन्हे सब
वृत्तान्त सूचित किया ।१७। युद्ध की इच्छा वाली उन स्त्रियो का युद्ध
करना मुन कर प्रसन्न हुए कल्कि जी रथ पर चढ कर सेना और अनुचरो
के सहित रणभूमि मे पहुचे ।१८। अनेक शस्त्रास्त्रो से सुसज्जिता, अनेक
प्रकार के वाहनो पर चढी हुई, व्यूह रचना करके युद्ध मे तत्पर उन
स्त्रियो को देख कर कल्किजी बोले ।१६। कल्किजी ने कहा — हे स्त्रियो !
मैं तुम्हारे हितार्थ श्रेष्ठ वचन कहता हूँ, वह सुनो । स्त्रियो को पुरुषो के
साथ युद्ध नही करना चाहिए ।२०।
इति कल्केर्वचः श्रुत्वा प्राहस्य प्राहूराहता ।
अस्माक त्व पतीन् हंसि तेन नष्टा वयं विभो ! ।
हन्तु गतानामस्त्राणि कराण्येवागतान्युत ।२१।
खड्ग-शक्ति धनुर्बाण-शूल तोमर-यष्टय ।
ताः प्राहुः पुरतो मूर्त्ताः कातंरस्वरविभूषणाः ।२२।
यामासाद्य वय नार्यो हिसायामः स्वजेतसा ।
तमात्मन सर्वमय जानीत कृतनिश्चया ।२३।
तमीशमात्मना नार्यः ! चरामो यदनुज्ञया ।
यत्कृता नामरूपादिभेदेन विदिता वयम् ।२४।