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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 441, कुल 442 में से

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पृष्ठ 441

൏ श्रीकालिका पुराण ൏ ४४५
चौंसठ योगिनी नाचत संगा। मद्यपान कीन्हेउ रण गंगा ॥
कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि। दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि ॥
कर खप्पर त्रिशूल भयकारी। अहै सदा सन्तन सुखकारी ॥
शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा। बाजत मृदंग भेरि के बाजा ॥
रक्त पान अरिदल को कीन्हा। प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा ॥
लपलपति जिह्वा तव माता। भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता ॥
लसत भाल सेंदुर को टीको। बिखरे केश रूप अति नीको ॥
मुंडमाल गल अतिशय सोहद। भुजामाल किंकण मनमोहत ॥
प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी। जगदम्बा कहि वेद बखानी ॥
तुम मशान वासिनी कराला। भजत तुरत काटहु भवजाला ॥
बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर। जहाँ बिराजत विविध रूप धर ॥
विन्ध्यवासिनी कहूँ बड़ाई। कहूँ कालिका रूप सुहाई ॥
शाकम्भरी बनी कहूँ ज्वाला। महिषासुर मर्दिनी कराला ॥
कामाख्या तव नाम मनोहर। पुजवहिं मनोकामना द्रुततर ॥
चंड मुंड वध छिन महं करेउ। देवन के उर आनन्द भरेउ ॥
सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा। अरिदल दलन लेहु अवतारा ॥
खलबल मचत सुनत हुँकारी। अगजग व्यापक देह तुम्हारी ॥
तुम विराट रूपा गुणखानी। विश्व स्वरूपा तुम महारानी ॥
उत्पति स्थिति लय तुम्हरे कारण। करहु दास के दोष निवारण ॥
माँ उर वास करहू तुम अंबा। सदा दीन जन की अवलंबा ॥
तुम्हरो ध्यान धरै जो कोई। ता कहँ भीति कतहूँ नहिं होई ॥
विश्वरूप तुम आदि भवानी। महिमा वेद पुराण बखानी ॥
अति अपार तव नाम प्रभावा। जपत न रहत रंच दुःख दावा ॥
महाकालिका जय कल्याणी। जयति सदा सेवक सुखदानी ॥
तुम अनन्त औदार्य विभूषण। कीजिये कृपा क्षमिये सब दूषण ॥
दास जानि निज दया दिखाबहु। सुत अनुमानित सहित अपनावहु ॥
जननी तुम सेवक प्रति पाली। करहु कृपा सब विधि माँ काली ॥
पाठ करै चालीसा जोई। तापर कृपा तुम्हारी होई ॥
दोहा:- जय तारा जय दक्षिणा, कलावती सुखमूल ।
शरणागत 'राजेश' है, रहहु सदा अनुकूल ॥
॥ इति काली चालीसा समाप्त ॥