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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 421, कुल 442 में से

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पृष्ठ 421

൵ल श्रीकालिका पुराण ൵ल ४२५
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कामाख्या मुझको दोनों ऊरुओं में रक्षित करे । दोनों घुटनों में शारदा
देवी रक्षा करें और दोनों जाँघों से रक्षा करें । दोनों पादों में ये महामाया
रक्षा करे और कामदा नित्य ही रक्षा करें । केश में कामेश्वरी रक्षा करे
तथा दोनों अंगों में मातंगी रक्षा करे । दाँतों के समुदाय में भैरवी रक्षा
करे तथा दोनों अंगों में मातंगी रक्षा करे । ललिता मेरी बाहुओं में रक्षा
करे और दोनों प्राणियों में वनवासिनी रक्षा करे । अंगुलियों में
विन्ध्यवासिनी देवी रक्षा करे और नखों की कोटियों में श्रीकामा रक्षा
करे । समस्त रोम कूपों में सदा गुप्तकामा परित्राण करें । पैरों की
अंगुलियों में तथा पार्ष्णिभाग में मेरी भुवनेश्वरी करे । जिह्वा में मेरी सेतु
रक्षा करे तथा कण्ठ के भीतर की रक्षा करे । वक्षस्थल के अन्दर में
लःरक्षा करे । बिन्दु के अन्दर से इन्दु रक्षा करे । समस्त नाड़ियों में
रक्षाकर और ईकार सभी सन्धियों में मेरी रक्षा करे स्नायुओं में मेरा
परित्राण चन्द्र करे तथा निरन्तर बिन्दु मज्जाओं में मेरी रक्षा करे ।
पूर्व दिशा में, आग्नेयी में, दक्षिण में, तथा नैर्ऋत में, वायव्य में,
ईशान में, कौवेर में, हर मन्दिर में प्रत्येक में उनको देवों ने तत्क्षण में
आरोहण कर-कर के पान किया था । स्नान किया था और पूर्व की
ही भाँति उन्होंने अतुल प्रीति को प्राप्त किया था । वे सब नीरोग होकर
अर्थात् परम स्वस्थ होते हुए वहाँ से गमन करे गए थे और परम विस्मय
से आकृष्ट चेतना वाले हो गए थे । वे सभी स्तवन करते हुए तथा
प्रस्तवन करते हुए गए थे जो कि कामाख्या देवी के योनि मण्डल की
स्तुति करते हुए ही वहाँ से गए । इसके अनन्तर देव गुरु को उन्होंने
प्रणाम किया था और मुझको भी अभिवादन किया था और मेरी स्तुति
की थी । फिर मैंने उनको विदा किया था और वे सब देवगण हर्ष से
विकसित लोचन वाले होते हुए स्वर्ग को चले गए थे । हे भैरव!
कामाख्या देवी का ऐसा ही महात्म्य है और देवी का कवच भी इसी
तरह का है जो कहा गया है । अब हे पुत्र! तत्त्व कों प्राप्त करके अपने
अभीष्ट के अनुसार विनियोग करके द्वारा उनकी प्राप्ति करके सुखी
होओ । यह कामाख्या का माहात्म्य है । अब अन्य मैं क्या तुमको