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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 420, कुल 442 में से

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पृष्ठ 420

४२४ श्रीकालिका पुराण
आकाश में गरुड़ के द्वारा गमन करते हुए मैंने महान् नीलगिरि को हाथ
से पकड़ लिया था और मैं उसको ऊपर उठाना चाहता था क्योंकि वह
गरुड़ की गति का कारण करने वाला था। वहाँ पर कामरूपों वाली
उस कामाख्या योगनिद्रा ने मुझको पकड़कर महासागर के जल में फेंक
दिया था। फिर मैं तल में पहुँच कर जो समुद्र का था अपने वाहन के
सहित गिर गया था। हे अन्धक के सूदन करने वाले! मैं यहाँ पर बहुत
अधिक समय से निवास कर रहा हूँ। मैं यहाँ पर ही इस महासागर के
जल में ही चिरकाल से ही रहता हूँ। हे महेश्वर! वह महामाया मेरे ऊपर
दया नहीं कर रही हैं और अभी तक भी मैं वैसा ही हो रहा हूँ। मेरे
ही लिए सभी ओर से ब्रह्मा आदिक अब समागत हुए थे। महादेवी ने
हठ से उन सबको भी माया के पाश से बद्ध कर दिया था। इस कारण
से आप हमारे ऊपर अनुग्रह कीजिए और अब मुझको शिवालय में ही
ले चलिए और हम लोग इस बन्धन की विशेष हिंसा से उस महादेवी
को प्रसन्न करेंगे। भगवान् हरि के उस वचन को सुनकर मैं करुणा से
युक्त हो गया था अर्थात् मुझे दया आ गई थी। फिर मैं परम प्रीति
से स्वयं ही ब्रह्माजी और भगवान् विष्णु से बोला था।
यह कामपूर्वा ईश्वर का एक सुमनोहर कवच है। उस कवच को
शरीर में बाँधकर और आप्लावित होकर पीछे मेरी और गमन करें। मैं
भी कवच बाँधे हुए हूँ। इस कारण से माया के द्वारा यहाँ पर मेरे संसर्ग
से ही बृहस्पति को निवृद्ध नहीं किया गया है। इस कारण से तुम लोग
मेरे वचन से उस कवच का श्रवण कर लीजिए। जिसके द्वारा सुख
के साथ भली-भाँति उपप्लुत होकर परमेश्वरी का दर्शन करेगा। ॐ
कामाख्या कवच के ऋषि बृहस्पति कहे गए हैं। उसकी देवी कामेश्वरी
देवी है तथा छन्द अनुष्टुप् होता है। उसका विनियोग सबकी सिद्धि में
होता है। हे देवताओं ! उसका आप श्रवण कीजिए। कण्ठ में महामाया
रक्षा करें फिर हृदय में कामेश्वरी रक्षा करें। कामाख्या जठर में रक्षा
करें और शारदा मुझको नाभि में रक्षा करें। त्रिपुरी दोनों पाश्र्वों में रक्षा
करे। मेदन में महामाया रक्षा करे। गुद में कामेश्वरी रक्षा करे और