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सर्वकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 321, कुल 442 में से

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पृष्ठ 321

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ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ

रचना करे जो द्वार और पद्म से वर्जित होवे । विसर्जन के लिए
निर्माल्य धारिणी के पूजन के लिए मण्डल रचना करे । निर्माल्य
धारिण का ध्यान पाद्य आदि के पूजन करे । उसमें निर्माल्य का
निक्षेपण करके मन्त्र से विसर्जन करे । हे परमेश्वरि! अपने परमस्थान
को गमन कीजिए जहाँ पर ब्रह्मा आदि देवगण परम को नहीं जानते हैं ।
इस मन्त्र के द्वारा विसर्जन करके अनन्तर पूरक वायु के द्वारा ध्यान
करते हुए इस मन्त्र से नमस्कार करके उसको हृदय में स्थापित करे ।
हे परमेश्वरि! हे देवि! परमोत्तम स्थान पर अपने आसन पर विराजमान
होइए । जहाँ पर मेरे हृदय में ब्रह्मादिक सब देवता स्थिति हैं । इसके
उपरान्त एक जटा बीजों से इष्ट देवी का बुद्धि से स्मरण करता हुआ
निर्माल्य को मूर्धा में ग्रहण करे जो कि धर्म-काम और अर्थ का साधन
होता है । इसके अनन्तर विभूति के मण्डल की प्रतिपत्ति करे । समस्त
अंगुलियों के समूहों से आठ दलों से संयुत पद्म को क्षति बीज के द्वारा
निर्मन्थन करे । हे भैरव! मण्डल का भी निर्मन्थन करना चाहिए । इसके
पश्चात् मूल मन्त्र के द्वारा अथवा पुनः सर्ववश्य के द्वारा अनामिकाओं
के अग्रभाग से ललाट का संस्पर्श करे । समाप्ति के सहित प्रान्त, उसके
आगे ताराबीज, स्मरबीज विसर्ग के सहित पर सभी-परम एक जटाबीज
होता है जो धर्म काम और अर्थ का साधन है ।
इसके अनन्तर आत्मा के सहित भास्करबीज के मन्त्र के द्वारा
भास्कर के लिए अच्छिद्रार्थ अर्घ्य का निवेदन करना चाहिए । हे ब्रह्मन्!
भास्वान्, कर्मदायी के लिए नमस्कार है । इसके बाद दोनों हाथों को
जोड़कर कथित मन्त्र को पढ़कर एकाग्रमन से वागियों द्वारा अच्छिद्र का
अवधारण करे । यज्ञ का छिद्र, तपश्चर्या का छिद्र, जो छिद्र, मेरे पूजन
में हो वह सब अच्छिद्र हो जावे । भास्कर भगवान् के प्रसाद से ही
अच्छिद्रता हो जावे । इसके पश्चात् पुष्प, नैवेद्य, जलपात्र आदि जो भी
हे उन सबको देवीबीज के द्वारा पुनःविलोकन करना चाहिए । हाथ से
अथवा चक्षु से जहाँ-जहाँ पर पहले मन्त्र न्यास किया है वहाँ-वहाँ ही
इससे विसृष्टि होती है ।