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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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पृष्ठ 834

(८२०)

कवीरपंथी—

पराई रे ॥ नारिको यार माते मदिरासे, विके बिराने हाथाई रे ॥
जो तनका तूं गर्ब करत है, सो तन नहीं रहाई रे ॥ अजहूं चेत
सुगध नर मूरख, सतगुरु होय सहाई रे ॥ अरे मतिमंद जनमके
अंधा, किन ऐसी मति दहाई रे ॥ कहैं कवीर अबकी बेर चेतो,
योही न जन्म गवाई रे ॥

शब्द १५४—क्या लड़ना बिराने भागोंसे ॥ टे० ॥ एक जु खाते
दूध बतासे, एक गुजारे सागोंसे ॥ एक जु चढ़ते हाथी घोडा,
एक लगे वाके बागोंसे ॥ एक जु पहिरे मखमल खासा, एक गुजारे
आगोंसे ॥ जो लिखनी बिघने लिख दीन्हा, सो न टरे वाके
भागोंसे ॥ कहैं कवीर सुनो भाइ साधो, सतगुरु चरन दीदारौसे ॥

शब्द १५५—मायाका गुलाम गेदी क्या जाने बंदगी ॥ टे० ॥
साधुसे धूमधाम, चोरनसे करे काम । धीगनसे हाथ जोरे, कपटकी
बंदगी ॥ कपटके माला लीन्हे, पाखंड तिलक दीन्हे । आधारंगी
धोती पहिरे, करत मिजाजगी ॥ होद न सके बंदगी, किया चाहे
सिद्धगी । कहैं कवीर धिक्कार ऐसी जिदगी ॥

शब्द १५६—गाफिला साईका नाम विसारा ॥ टे० ॥ पानीके
बुंदसे पिंड प्रगट भये, ऐसा सिरजनहारा ॥ नीचे शिर ऊपर पग
तेरा, जब तूं किया पुकारा ॥ नौ दस मास गर्भ प्रतिपाले, वहां
तोहि दिया अहारा ॥ जठर अगिनमें राख लियो है, ऐसा राखन-
हारा ॥ कौल बोलके बाहिर आये, यहां भये वटपारा ॥ कहैं कवीर
समुझ नर अंधा, कौलको करो संभारा ॥

शब्द १५७—दोय दिन पडाव हैदा भाई ॥ टे० ॥ हिंदू श्रवर
घेरके मारे, मुसलमान काटे गार्ई ॥ घड पखानके सुरत बनाये,
ता पूजन दुनिया धार्ई ॥ सुरदा गाड मसीत बनाये, तासों पीर
कहे भाई ॥ कहैं कवीर सुनो भाई साधो, विन समुझे परलैं जाई ॥