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सर्वकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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शब्दावली

(७३)

अष्टक-भो दयाल जगत पाल कालजाल खंडनं ॥ पाप ताप
दहनहार दिव्य ज्ञान मंडनं ॥ भवअपार कर्णधार पाकनाम
अंकजं ॥ चरण शरण देहि मेनमामि पाद पंकजं ॥ १ ॥ सत्प्रकाश
चिदाभास नाम रूप अक्षकं ॥ जगत ब्रह्म आत्म सर्व साक्षी आदि
लक्षकं ॥ दयाधीर युक्तयोग विशुद्ध नाम अंकजं ॥ चरण शरण
हि मे नमामि पाद पंकजं ॥ २ ॥ हंसभूप परमरूप भुक्ति मुक्ति
दायकं ॥ दक्ष मक्ष रक्ष प्रभु सर्व संत नायकं ॥ परीक्ष अक्ष निर्मलं
विशुद्ध नाम अंकजं ॥ चरण शरण देहि मे नमामि पाद पंकजं ॥ ३ ॥
बिरह कलोल ब्रह्म गोल तत्त्वमसि छेदिकं ॥ वेद विद्यातीत त्वं
चतुर स्थान भेदिकं ॥ त्वयंअक्षि साधु पक्षि शुद्धनाम अंकजं ॥
चरण शरण देहि मे नमामि पाद पंकजं ॥ ४ ॥ परख भान संत
ध्यान षड पुटी विनाशिकं ॥ आदि अंत मध्य नाना नेति भास
भासिकं ॥ कृपासिधु शील इन्दु विशुद्ध नाम अंकजं ॥ चरण
शरण देहि मे नमामि पाद पंकजं ॥ ५ ॥ विश्व चित्र तासु मित्र
तत्पवित्र शासनं ॥ शुचि पवित्र त्वं विचित्र सार शब्द भाषनं ॥
करुणामय कवीर औ विशुद्धनाम अंकजं ॥ चरण शरण देहि मे
नमामि पाद पंकजं ॥ ६ ॥ जोगजीत भौ अजीत न्याय नीति
कारणं ॥ ऋद्धि सिद्धि निद्धि दाता बिरद हस्त धारणं ॥ सुखाधि
दीनपालकं विशुद्धनाम अंकजं ॥ चरण शरण देहि मे नमामि
पाद पंकजं ॥ ७ ॥ बुद्धि अंध ज्ञान मंद हीन छंद स्वष्टकं ॥
पूरन दास भाषिते सु पाकनाम अष्टकं ॥ त्वंप्रसादसुगमसर्व विशुद्ध
नाम अंकजम् ॥ चरण शरण देहि मे नमामि पाद पंकजं ॥ ८ ॥

अष्टक-

मंगलरूप अनुपमपूरन नाम कवीर सो आप उदारा ॥ मोपर
हृष्टि दयाकरि हरेहु हौ अति बालक दास तुम्हारा ॥ काम अपार
महाबल भारथ देखतके मम चित्त डेरावे ॥ कीजे कृपा उर