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कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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शब्दावली

(३२७)

करो प्रकासा । सत्य शब्द मानो विश्वासा ॥ कहहिँ कवीर सुनो
धर्मदासा । वीरा नाम करो प्रकासा ॥५॥

साखी-गुरुमुक्तावें जीवको, चौरासी बन्ध छोर ।

मुक्त प्रवाना देहिं गुरु, यमसे तिनुका तोर ॥१॥

शब्द तिनुकाका ॥ १ ॥

जमुनियाकी डार साहेब तोड़ दीजे हो ॥ एक जमुनियाकी
चौदह डार । सार शब्दसे मोड़ दीजे हो ॥ १ ॥ सुरति हमारी
अजब पियासी, प्रेम अमीरस घोरि दीजे हो ॥२॥ गुरु हमारे
ज्ञान जौहरी, हीरा पदारस मोल दीजे हो ॥ ३ ॥ यह संसार
विषय रस माते । भर्म केवरिया खोल दीजे हो ॥४॥ धर्मदासको
अरज गोसाई । जीवन बन्ध छोड़ दीजे हो ॥५॥

शब्द तिनकाका ॥ २ ॥

जमुनियाकी डार मोरि तोरदे सतगुरु तोरदे ॥ टेक ॥ काया
कंचन अजब प्याला, नाम बूटी रस घोरदे । घोरदे सतगुरु घोरदे,
जमुनियाकी डार साहब तोरदे ॥ १ ॥ सुरति सुहागिन अजब
पियासी, अमृत रसमें बोरदे । बोरदे सतगुरु बोरदे, जमुनियाकी
डार साहब तोरदे ॥२॥ तू है सतगुरु ज्ञान जौहरी, रतन पदारथ
खोल दे । खोल दे सतगुरु खोल दे, जमुनियाकी डार साहब
तोरदे ॥ ३ ॥ धरमदासकी अरज गुसाई, जीवनको बन्धन छोर
दे । छोर दे साहब छोर दे, जमुनियाकी डार साहब तोर दे ॥४॥
साखी-धन्य भाग उस दासको, सतगुरु दिये सुसाज ।

माथ नवावे काल तिहीं, पायो नाम जहाज ॥६॥

शब्द नाम लखावन ।

गुरु पैया लागु नाम लखाय दीजे हो ॥ युगन युगनके सोवल
मनुआ, दे सत शब्द जगाय दीजे हो ॥१॥ घट अधियार वस्तु