कबीर बीजक (सन्त कबीर साहिब - हंसदास शास्त्री कृत सविस्तार हिन्दी टीका सहित)
Kabir Bijak with Comprehensive Hindi Commentary
सद्गुरु कबीर साहिब (टीकाकार: हंसदास शास्त्री) द्वारा
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इस ग्रन्थ के बारे में
बीजक सन्त कबीर की वाणी का वह संग्रह है जिसे कबीरपन्थ की कई शाखाएँ प्रामाणिक मूल ग्रन्थ मानती हैं। इसमें रमैनी, शब्द, ज्ञान चौंतीसा, विप्रमतीसी, कहरा, बसन्त, चाचर, बेलि, बिरहुली, हिंडोला और साखी जैसे प्रकरण हैं। परम्परागत गणना में चौरासी रमैनियाँ, एक सौ पन्द्रह शब्द और तीन सौ तिरपन साखियाँ मानी जाती हैं।
यह संस्करण रीवाँ के महाराजा विश्वनाथ सिंह जूदेव की 'पाखण्डखण्डनी' टीका सहित है। मुखपृष्ठ के अनुसार इसमें कबीर साहब की कथा, मूल रमैनी और बघेल वंश से जुड़ा निर्देश भी है। इसे रीवाँ नरेश महाराजाधिराज सर वेङ्कटरमण रामानुजप्रसाद सिंह जूदेव की आज्ञा से, खेमराज श्रीकृष्णदास ने अपने 'श्रीवेङ्कटेश्वर' स्टीम यन्त्रालय, बम्बई से संवत् १९६१ (शक १८२६) में छापा। पाठ का शोधन कबीरपन्थी भारत-पथिक स्वामी युगलानन्द ने किया, और ग्रन्थ रीवाँ नरेश को समर्पित है।
रीवाँ के बघेल राजवंश का कबीरपन्थ से पुराना सम्बन्ध रहा है, और महाराजा विश्वनाथ सिंह की यह टीका कबीर-वाणी की एक राजकीय और वैष्णव दृष्टि से की गई व्याख्या के रूप में जानी जाती है। ७६६ पृष्ठों का यह संस्करण कबीर-साहित्य के अध्येताओं और कबीरपन्थी पाठकों के लिए महत्त्वपूर्ण है।
( २ ) जाहिरात ।
नाम. की. रु. आ.
तथा प्रथम भाग ( ३-आदि, सभा, वनपर्व ) .... ... ... १-०
तथा द्वितीय भाग ( २-विराट, उद्योगपर्व ) ... ... ... १-०
तथा तृतीय भाग ( ८-भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, गदा, सौप्तिक,
ऐषिक, स्त्रीपर्व ) .... ... ... ... ... १-०
तथा चतुर्थ भाग ( ५-शान्ति, अश्वमेध, आश्रमवासिक, कुशल, स्वर्गा-
रोहणवर्णन ) .... ... ... ... .... १-०
विजयमुक्तावली ( महाभारतका सूक्ष्म वृत्तांत छंद बद्ध ) .... १-०
❊ परिहासदर्पण ... ... .... ... ... .... ०-६
अर्जुनगीता भाषा .... ... ... ... ... ... ०-४
शनिकथा कायस्थकी .... ... ... .... ... ... ०-१॥
शनिकथाराघवदासकृत ... ... ... ... ... ... ०-२
शनिकथा बड़ी पं० रामप्रतापजीकृत ... ... ... .... ०-८
रुक्मिणी मंगल बड़ा ( पद्मभक्तकृत मारवाडी भाषा ) .... ... १-४
हनुमानबाहुक पंचमुखी कवच समेत मूल ... ... ... ०-१॥
नासिकेतपुराणभाषा ( स्वर्गनरकका वर्णन ) ... ... ... ०-६
नरसीमेहताका मामेरा बड़ा ... ... ... ... ... ०-५
विस्मिलपरिवारका स्वांग ( इश्कचमन ) ... ... ... ०-८
सूर्यपुराणादि २२५ रत्न अतिउत्तमकागज और जिल्दबंधा ... ०-८
सूर्यपुराणादि २२५ रत्न रफू ... ... ... ... ०-६
ज्ञानमाला .... ... .... ... .... ... ... ०-२
मंगलदीपिका अर्थात् शाखोच्चार... ... ... ... ०-१॥
दंपतिवाक्यविलास-जिसमें सब देशांतरकी यात्रा और धंधेके
सुखको पुरुषने मंडन और स्त्रीने खंडन किया है दोहा
कवित्तोंमें ( सुभाषित ) ... ... ... ... ०-१२
रसरंग ( ज्ञानभक्तिमार्गी अजबरँगीले पद्य कृष्णगढ़
महाराज प्रणीत ) ... ... ... ... ... ०-८
जाहिरात । ( ३ )
नाम. की. रु. आ.
दादूरामोदय संस्कृत—दादूपंथी साधुओंको ... ... ... ०-१०
श्यामकामकैलि ... .... ... ... ... ... ... ०-४
परमेश्वरशतक .... ... ... ... ... .... ०-६
भक्तिप्रबोध ... ... .... ... ... .... ०-२
भावपंचाशिका कविवृंदजीकृत ... .... ... ... ... ०-२
प्रेमशतक ... ... ... ... ... .... ०-४
मदनमुखचपेटिका भाषाटीका .... ... .... ... .... ०-४
प्रेमवाटिका भाषा ( रोचक भजन ) .... ... ... ... ०-२
हनुमत्पताका छन्दबद्ध ( वीररसके रोचककवित्त ) .... .... ०-३
नामप्रताप छन्दबद्ध ( श्रीरामनाम माहात्म्य ) ... ... ... ०-१॥
शृंगारांकुर भाषा—छन्दबद्ध ( रसकाव्य ) ... ... ... ०-२
जगन्नाथशतक—इसमें रघुराजसिंह रीवाँधिपतिके बनायेहुये १००
कवित्त विनयके हैं ... ... .... ... ... ... ०-३
नैषधकाव्य मनहरणछन्दोमें राजा नल
दमयन्तीका सम्पूर्ण उदाहरणों समेत चरित्र .... ... १-०
सुन्दरीतिलक ( शृंगाररसके चुहचुहाते हुए
कवित्त भारतेन्दु बाबू हरिश्चन्द्रजी संगृहीत ) ... .... ०-६
विक्रमविलास ( छन्दबद्ध वैतालपचीसी ) .... ... ... ०-८
मसलानामा ( मसलोंके उदाहरणमें शिक्षावर्णन ) .... .... ०-२
काव्यसंग्रह ( प्राचीन रोचक कवित्त सवैया ) ... .... ... ०-८
काव्यरत्नाकर ( एक २ समस्यामें रोचकता
पूर्वक अनेक कवियोंकी चातुरीके कवित्त ) .... .... ... ०-८
आरती संग्रह २९ आरतीका .... ... .... ... .... ०-१॥
हनुमानसाठिका ( हनुमानजीकें ओजवर्द्धक ६० कवित्त ) ... ०-१॥
भाषाभूषण ( नायकाभेद मधुर छंदबद्ध ) .... ... ... ०-२
अनुरागरसभाषा ( नारायणस्वामिकृत ) पद्योंमें.... ... ... ०-३
( ४ ) जाहिरात ।
नाम. की. रु. आ.-
प्रेमपुष्पमंजरी ( अच्छे २ भजन व पंजाबदेशके भी पद हैं.... ०-२
कृष्णचरितावली ( कृष्णकी छोटी २ लीला ) ... ... ... ०-४
प्रेमपचासा ( चित्रकाव्य ) ... ... .... ... .... ०-३
सुदामाचरित्र अत्युत्तम छंदबद्ध ... .... ... ... ... ०-३
होलीचौताल संग्रह ... ... .... ... ... ... ०-४
सुदामाकी बारहखड़ी ... ... .... .... ... ०-१
द्रौपदीकी बारहमासी ... ... ... ... ... ०-१
दुर्गाचालीसी ... ... ... ... ... .... ०-१
माता पिता पूजनविधि .... ... .... .... ... ०-१
बारहमासी संग्रह ... ... .... .... ... ०-१॥
हरदेवकी बारहखड़ी कलियुगका चरित्र ... ... ... ... ०-२
छन्दरत्नमाला [ पिंगल ] ... ... ... ... ०-२
गोपीवियोगकी बारहखड़ी [ लालाशालिग्रामकृत दत्तलालकी बारहखडी
सहित ] ... .... ... ... ... .... ०-२
नशाखण्डनचालीसी ४० कवित्तोंमें सब नशोंका खण्डन... ... ०-२
मिलापदर्पण ( मेलमिलाप शिक्षा ) ... ... ... ०-२
श्राद्धदर्पण ( श्राद्धमण्डन ) ... ... ... ... ०-२
ब्रह्मज्ञानदर्पण ... ... ... ... ... ०-२
पंजाबपंकजपराग [ महन्त रघुवीरदासकृत ] ... ... ... ०-४
प्रेमपुष्पलता ( उत्तमभजन ) .... ... ... ... .... ०-८
कबीरउपासनापद्धति- ( साधारणतःसर्वसाधारणको और विशेषतः कबीर
पंथियोंको सदाचार बतानेवाली अद्वितीय पुस्तक ) ... ०-१०
संपूर्ण पुस्तकोंका " बड़ा सूचीपत्र " अलग है मँगालीजिये.
पत्ता-खेमराज श्रीकृष्णदास,
“ श्रीवेङ्कटेश्वर ” ( स्टीम् ) प्रेस-बंबई.